सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने कहा, एक बार अगर यह सिद्ध हो जाता है कि बीमा प्रदाता की सेवा की गुणवत्ता में किसी तरह गलती नहीं है, तो उसके बाद उपभोक्ता फोरम इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं कर सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि उपभोक्ता किसी उपभोक्ता फोरम में तब तक नहीं जीत सकता जब तक सेवा प्रदाता की ओर से सेवा में कमी नहीं हो। कोर्ट ने आगे कहा, सिविल कोर्ट के विपरीत ऐसा कोई पैनल किसी बीमा सर्वेयर की फोरिंसिक जांच का विषय नहीं हो सकता।
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कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के निष्कर्षों को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक फर्म ने यह दलील देते हुए बीमा राशि पर दावा जताया था कि सर्वेयर ने बीमाकृत संपत्ति के नुकसान का सही आकलन नहीं किया था।
जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने कहा, एक बार अगर यह सिद्ध हो जाता है कि बीमा प्रदाता की सेवा की गुणवत्ता में किसी तरह गलती नहीं है, तो उसके बाद उपभोक्ता फोरम इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं कर सकता।
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तथ्यों का हवाला देते हुए फैसले में कहा गया कि यह ऐसा मामला नहीं है जहां बीमा कंपनी ने अपीलकर्ता के दावे को मनमाने ढंग से या अनुचित आधार पर खारिज कर दिया हो। बल्कि यह ऐसा मामला है, जहां सर्वेक्षणकर्ता द्वारा आकलन किए गए नुकसान की सीमा तक अपीलकर्ता के दावे को स्वीकार कर लिया गया है।