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Supreme Court: एससी-एसटी कोटे के अंदर उपवर्ग बनाने के मुद्दे पर आदेश सुरक्षित; संविधान पीठ कर रही है सुनवाई

Thu, 08 Feb 2024 05:08 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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एससी-एसटी आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण की वैधता से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने  आदेश सुरक्षित रख लिया है। शीर्ष कोर्ट की सात न्यायधीशों की संविधान पीठ इस मुद्दे पर सुनवाई कर रही है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की सात सदस्यीय संविधान पीठ इस प्रश्न की जांच कर रही है कि क्या राज्य के पास एससी-एसटी कोटे के अंदर कोटा देने की वर्गीकृत शक्ति है। पीठ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 2010 में आए एक फैसले के खिलाफ 23 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

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इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि वह सकारात्मक कार्रवाई के उपाय के रूप में पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की घोषित नीति के लिए प्रतिबद्ध है हालांकि वह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के भीतर उप-वर्गीकरण का समर्थन करती है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष बहस करते हुए केंद्र सरकार ने एससी-एसटी की आरक्षित श्रेणी के भीतर सबसे पिछड़े वर्गों को चिह्नित करने के विचार का समर्थन किया ताकि राज्यों को आरक्षित सीटों के उप-वर्गीकरण पर उचित नीतियां बनाने में सक्षम बनाया जा सके।

संविधान पीठ एससी-एसटी आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण की अनुमति पर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। केंद्र ने यह स्पष्ट कर दिया कि उप-वर्गीकरण पर उसके तर्कों को हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए कोटा लाभ के विरोध के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल ने पीठ से कहा, ये प्रस्तुतियां केवल इस पीठ को संदर्भित प्रश्न यानी उप-वर्गीकरण की अनुमति तक ही सीमित हैं और इसे केंद्र सरकार की आरक्षण नीति में किसी भी तरह की कमजोर करने के रूप में नहीं माना जा सकता है। सरकार इस तरह के सकारात्मक कार्यों द्वारा समानता प्राप्त करने की मकसद से आरक्षण देने के अपने दायित्वों का पालन करना जारी रखेगी। मेहता ने कहा, आरक्षण उन लोगों के लिए समानता लाने के लिए सकारात्मक कार्रवाई का एक उपाय है, जिन्होंने सैकड़ों वर्षों से भेदभाव झेला है। सॉलिसिटर जनरल ने पीठ से कहा, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि एक नीति के रूप में आरक्षण के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। मेरी दलीलें केवल उप-वर्गीकरण के पहलू पर हैं।
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