कृषि कानूनों को वापस लेने को लेकर 10 महीनों से सिंघु बॉर्डर पर किसान डेरा जमाए हुए हैं। लोगों की आवाजाही में दिक्कतें हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट में सड़क खाली कराने को लेकर एक याचिका लगाई गई थी, लेकिन कोर्ट ने सुनने से इनकार कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें किसानों द्वारा अवरुद्ध सिंघु बॉर्डर पर खोलने की मांग की गई थी। तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान सिंघु बॉर्डर पर जमे बैठे हैं। याचिका हरियाणा के सोनीपत के निवासियों की ओर से दायर की गई थी।
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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्ताओं को याचिका वापस लेने और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की छूट प्रदान कर दी।
पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से कहा, 'विरोध करने के अधिकार और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच के अधिकार के बीच संतुलन होना चाहिए। आप सोनीपत के निवासी हैं। आप हाईकोर्ट क्यों नहीं गए? हाईकोर्ट वहां के हालात और स्थानीय स्तर पर होने वाली चीजों से अवगत है। इसलिए हाईकोर्ट इस मुद्दों से निपटने के लिए बेहतर है। हमें क्यों हस्तक्षेप करना चाहिए।' पीठ ने यह भी कहा कि प्रचार के लिए याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर की गई हैं।
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पीठ ने यह भी कहा, यह अदालत समस्या का पहला समाधान नहीं है। स्थानीय समस्याओं के लिए हाईकोर्ट हैं। हमारे पास ठोस व्यवस्था है।’ याचिकाकर्ता सोनीपत निवासी जय भगवान और जगबीर सिंह छिकारा की तरफ से पेश हुए वकील अभिमन्यु भंडारी ने कहा कि सिंघू बोर्डर महानगर के लोगों के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है जो दिल्ली और हरियाणा को जोड़ता है लेकिन जाम के कारण इससे आवाजाही के लोगों के अधिकार का हनन हो रहा है।