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Supreme Court: तेजस्वी यादव की याचिका पर आदेश सुरक्षित, मानहानि मामले को स्थानांतरित करने की है मांग

Mon, 05 Feb 2024 01:31 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

तेजस्वी यादव के बयान के खिलाफ गुजरात के रहने वाले हरेश मेहता ने तेजस्वी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था। मेहता ने आरोप लगाया कि तेजस्वी के बयान से गुजरातियों की मानहानि हुई है। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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तेजस्वी यादव द्वारा मानहानि मामले में दायर की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। तेजस्वी यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उनके खिलाफ अहमदाबाद कोर्ट में चल रहे मानहानि मामले को राज्य के बाहर, प्राथमिक तौर पर दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की थी। याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस एएस ओका और जस्टिस उज्जल भुयन ने तेजस्वी यादव द्वारा दायर किए गए माफीनामे पर नोटिस लेने के बाद अपने आदेश को सुरक्षित रख लिया। 
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तेजस्वी यादव ने बीते साल मार्च में दिए अपने एक बयान में कहा था कि 'अब की परिस्थितियों में सिर्फ गुजराती ही ठग हो सकते हैं और उनकी धोखाधड़ी को माफ भी कर दिया जाएगा।' तेजस्वी यादव के इस बयान के खिलाफ गुजरात के रहने वाले हरेश मेहता ने तेजस्वी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था। मेहता ने आरोप लगाया कि तेजस्वी के बयान से गुजरातियों की मानहानि हुई है। 

इस मामले की सुनवाई अहमदाबाद की कोर्ट में चल रही थी। जिस पर तेजस्वी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मामले की सुनवाई को गुजरात से बाहर ट्रांसफर करने की मांग की थी। तेजस्वी ने बीती 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर इस मामले को वापस लेने की मांग की थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने तेजस्वी यादव को अपने आरोपों को वापस लेते हुए अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। 
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प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने उच्चतम न्यायालय आए विदेशी प्रतिनिधियों का स्वागत किया

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय आए ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के न्यायाधीशों सहित विदेशी प्रतिनिधियों का स्वागत किया। तीन फरवरी को आयोजित राष्ट्रमंडल अटॉर्नी और सॉलिसिटर जनरल सम्मेलन के लिए विभिन्न देशों के न्यायाधीश, सॉलिसिटर और अटॉर्नी जनरल भारत दौरे पर आए हुए हैं। न्यायिक कार्यवाही देखने के लिए कई गणमान्य व्यक्ति सोमवार को शीर्ष अदालत पहुंचे।

आबकारी मामले में सिसोदिया ने उपचारात्मक याचिकाओं पर जल्दी सुनवाई की अर्जी दी

जेल में बंद आम आदमी पार्टी (आप) नेता मनीष सिसोदिया ने कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार और धन शोधन के मामले में 2023 में उन्हें जमानत देने से इनकार करने के फैसले को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में दाखिल अपनी दो उपचारात्मक याचिकाओं पर जल्द सुनवाई करने की अर्जी दी। सिसोदिया की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ को बताया कि वह (सिसोदिया) एक वर्ष से जेल में बंद हैं और उन्होंने इन उपचारात्मक याचिकाओं को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया है।

हत्या की केस डायरी पेश करे सीबीआई: सर्वोच्च न्यायालय
उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई से कहा कि वह आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के भाई वाईएस विवेकानंद रेड्डी की हत्या की केस डायरी पेश करे। अदालत में सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि केस डायरी में साठ खंड हैं। इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता विवेकानंद रेड्डी की बेटी सुनीनता रेड्डी की ओर से वकील सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए। उन्होंने कहा, इस मामले में दो-तीन मुद्दों पर विस्तार से सुनवाई की जरूरत है। मामले में अगली सुनवाई 22 अप्रैल को होगी। 
   
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बीआरएस नेता के कविता को ईडी के सामने पेश होने से राहत 
दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश होने से बीआरएस नेता के कविता को राहत जारी रहेगी। दरअसल, शीर्ष कोर्ट ने एजेंसी के समन को चुनौती देने वाली उनकी याचिका सोमवार को 16 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी। न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने यह स्थगन आदेश दिया। इस दौरान सुनवाई के दौरान कविता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मामले को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है।

ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत को बताया कि कविता समन से बच रही है और एजेंसी के सामने पेश नहीं हो रही है। सिब्बल ने तब कहा कि एएसजी ने पिछले साल सितंबर में पीठ को आश्वासन दिया था कि एजेंसी लोकसभा सांसद कविता को तब तक पूछताछ के लिए नहीं बुलाएगी जब तक अदालत समन को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई नहीं कर लेती।
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