फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने CAQM को लगाई फटकार, कहा- पराली जलाने से रोकने के लिए कुछ नहीं किया

Thu, 03 Oct 2024 01:53 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीठ ने कहा कि पराली जलाने के मुद्दे पर सीएक्यूएम की 29 अगस्त को ही बैठक हुई थी। इस बैठक में 11 में से केवल पांच सदस्य ही मौजूद थे, जहां उनके द्वारा जारी किए गए निर्देशों को लागू करने पर चर्चा तक नहीं हुई। 
 
विज्ञापन
Supreme Court - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Commission for Air Quality Management (CAQM)) को फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने सीएक्यूएम से कहा कि उन्होंने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को लागू कराने के लिए कुछ नहीं किया। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि सीएक्यूएम ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में पराली जलाने की घटनाओं के खिलाफ एक भी मुकदमा नहीं चलाया है।
विज्ञापन


पीठ ने कहा कि पराली जलाने के मुद्दे पर सीएक्यूएम की 29 अगस्त को ही बैठक हुई थी। इस बैठक में 11 में से केवल पांच सदस्य ही मौजूद थे, जहां उनके द्वारा जारी किए गए निर्देशों को लागू करने पर चर्चा तक नहीं हुई। शीर्ष अदालत ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को भी फटकार लगाते हुए कहा कि दोनों राज्यों ने पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ भी कुछ खास कार्रवाई नहीं की है और बहुत ही कम जुर्माना वसूला गया है। न्यायालय ने केंद्र और सीएक्यूएम को एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अब कोर्ट इस मामले पर 16 अक्टूबर को अगली सुनवाई करेगी। 

तेंदुओं को देखते ही गोली मारने के निर्देश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य वन्यजीव वार्डन द्वारा आदमखोर तेंदुओं को देखते ही गोली मारने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। इस पर वकील ने आज ही सुनवाई की मांग की क्योंकि राजस्थान रिजर्व में तेंदुओं को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। गौरतलब है कि उदयपुर जिलों के गांवों में आदमखोर तेंदुओं का आतंक है। पिछले 12 दिनों में तेंदुए 8 लोगों की जान ले चुके हैं। 

हाशिमपुरा नरसंहार:सुप्रीम कोर्ट ने दोषी की याचिका पर विचार करने से किया इन्कार
सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को हाशिमपुरा नरसंहार के एक दोषी की दायर जमानत याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। दोषी ने अपने टूटे-फूटे घर की मरम्मत कराने के लिए जमानत मांगी थी। जस्टिस अभय एस ओका, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह आरोपी को जमानत देने का आधार नहीं हो सकता।

जस्टिस ओका ने पूछा, यह किस तरह का आधार है। इसके बाद दोषी बसंत वल्लभ ने याचिका वापस ले ली। वल्लभ ने लंबित आपराधिक अपील में अंतरिम जमानत याचिका दायर की थी। यह अपील 2018 के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ थी, जिसमें 1987 के हाशिमपुरा नरसंहार में 16 पूर्व प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) और पुलिस कर्मियों को दोषी ठहराया गया था और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट के फैसले ने ट्रायल कोर्ट की ओर से पहले बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया था। बता दें कि मई 1987 में मुस्लिम समुदाय के 40 से अधिक लोगों को पीएसी कर्मियों ने घेर लिया था और गोली मार दी थी। नरसंहार में पांच लोग बच गए थे।
विज्ञापन

प्रसादम विवाद: कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कल
तिरुपति के लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी के इस्तेमाल के मामले में अदालत की निगरानी में मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत पहले बृहस्पतिवार को दोपहर 3.30 बजे मामले की सुनवाई करने वाली थी, लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की सुनवाई शुक्रवार को सुबह 10.30 बजे करने का अनुरोध किया। पीठ ने अनुरोध पर सहमति जताते हुई कहा कि वह मामले पर शुक्रवार को सुनवाई करेगी।

30 सितंबर को मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने मेहता से यह तय करने में सहायता करने को कहा था कि क्या राज्य सरकार की ओर से नियुक्त एसआईटी द्वारा जांच जारी रखी जानी चाहिए या एक स्वतंत्र एजेंसी को जांच करनी चाहिए। अदालत ने शीर्ष कानून अधिकारी से मुद्दे पर विचार करने और इस संबंध में सहायता करने को कहा था। 30 सितंबर को पीठ ने कहा था कि देवी-देवताओं को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें