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शीर्ष अदालत: 'टीवी समाचार चैनलों के स्व-नियामक तंत्र को सख्त बनाना चाहते हैं', सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

Mon, 18 Sep 2023 03:20 PM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने कथित मवेशी तस्करी मामले में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस नेता अनुब्रत मंडल की जमानत याचिका पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब मांगा है। आइए पढ़ते हैं सुप्रीम कोर्ट की कुछ अहम खबरें...
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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टीवी समाचार चैनलों की निगरानी के स्व-नियामक तंत्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि वह इस तंत्र को सख्त बनाना चाहता है। कोर्ट ने न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (एनबीडीए) को नए दिशानिर्देशों के साथ आने के लिए चार सप्ताह का समय भी दिया।

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भारत के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने इन जवाबों का संज्ञान लिया कि एनबीडीए नए दिशा-निर्देशों को तैयार करने के लिए अपने मौजूदा अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) एके सीकरी और पूर्व अध्यक्ष आरवी रवींद्रन के साथ परामर्श कर रहा है। एनबीडीए की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने नए दिशा-निर्देशों के साथ आने के लिए चार सप्ताह का वक्त मांगा।

इस बीच केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार पहले ही तीन चरणीय तंत्र बना चुकी है, जिसमें से पहला स्व-नियामक ही है। 'न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया' (एनबीएफआई) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि एनबीडीए के उलट 2022 नियमों के मुताबिक एनबीएफआई ही ऐसी एकमात्र नियामक इकाई है, जो केंद्र के साथ पंजीकृत है। एनबीएफआई को भी अपने स्वयं के नियम दाखिल करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
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प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि  हम यहां एनबीडीए और एनबीएफआई के वैचारिक मतभेदों को नहीं सुलझा सकते। हम नहीं चाहते कि दो प्रतिद्वंदियों की बहस के बीच यह याचिका कहीं गुम हो जाए। हम उनके नियमों को देखेंगे और उसके बाद आपके। इसके बाद प्रधान न्यायाधीश ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद के लिए निर्धारित कर दी।

इससे पहले शीर्ष कोर्ट ने टीवी समाचार चैनलों की निगरानी के लिए मौजूदा स्व-नियामक तंत्र में त्रुटियां पाई थीं। कोर्ट ने इसे अधिक प्रभावी बनाने की इच्छा जाहिर की थी। कोर्ट ने इसके लिए केंद्र से जवाब मांगा था। पीठ ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि वह मीडिया पर किसी प्रकार की सेंसरशिप नहीं लगाना चाहती।

अनुब्रत मंडल (फाइल) - फोटो : Twitter
अनुब्रत मंडल की जमानत याचिका पर सीबीआई को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने कथित मवेशी तस्करी मामले में गिरफ्तार तृणमूल कांग्रेस नेता अनुब्रत मंडल की जमानत याचिका पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जवाब मांगा है। जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी ने जांच एजेंसी को नोटिस जारी किया और याचिका पर जवाब मांगा। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने जनवरी में अनुब्रत मंडल की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। वे पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के बीरभूम जिला अध्यक्ष हैं। अपने जमानत के अनुरोध में मंडल ने कहा था कि वह मामले में 145 दिन से अधिक समय से हिरासत में हैं।

डॉ. नरोत्तम मिश्रा - फोटो : अमर उजाला
नरोत्तम मिश्रा को अयोग्य ठहराने से जुड़े मामले में सुनवाई करेगी कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को विधायक के रूप में अयोग्य ठहराने के 2017 के फैसले को रद्द करने संबंधी याचिका पर 11 अक्तूबर को सुनवाई करेगा। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ निर्वाचन आयोग ने अर्जी लगाई है। जस्टिस अभय एस ओका और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने नरोत्तम मिश्रा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आर्यमा सुंदरम की इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि याचिका पर नवंबर के बाद सुनवाई की जाए। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव नवंबर के आसपास होने हैं। 

वहीं, पीठ ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा से हार का सामना करने वाले कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती ने भी एक अर्जी दायर कर मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया है। निर्वाचन आयोग का आदेश राजेंद्र भारती की शिकायत पर आया था, जिन्होंने 2008 का विधानसभा चुनाव मिश्रा के खिलाफ लड़ा था। 

दतिया विधानसभा क्षेत्र से जीतने वाले नरोत्तम मिश्रा ने 12 जुलाई 2017 को निर्वाचन आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें दावा किया गया था कि कार्यवाही में देरी हुई और यह दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं था कि वे पेड न्यूज जैसे मामले में शामिल थे। शीर्ष अदालत ने 17 जुलाई 2017 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले शीघ्र निर्णय लेने के लिए मामले को दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड में परिसीमन आयोग गठित करने पर विचार
केंद्र ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में परिसीमन प्रक्रिया के लिए आयोग गठित करने पर विचार कर रहा है। सीजेआई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार दोनों पूर्वोत्तर राज्यों के लिए परिसीमन आयोग गठित करने पर विचार कर रही है। उन्होंने बिना अधिक विवरण साझा किए कहा कि जहां तक मणिपुर का सवाल है, प्रक्रिया स्पष्ट कारणों से लंबित है। पीठ ने मेहता से दो सप्ताह बाद इस संबंध में जानकारी देने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI
बांधों से अचानक पानी छोड़े जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें बांधों से अचानक पानी छोड़े जाने के खिलाफ दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि अचानक पानी छोड़े जाने से कुछ इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित अधिकारियों के पास जाने के लिए कहा। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ के सामने यह याचिका सुनवाई के लिए आई थी।
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देश में एक सांविधानिक धर्म की मांग वाली जनहित याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देश में एक ‘सांविधानिक धर्म’ की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वह लोगों को उनके संबंधित धार्मिक विश्वासों का पालन करने से रोक सकता है। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि उसे ऐसी याचिका दायर करने का विचार कहां से आया। पीठ ने कहा, आप कहते हैं कि एक सांविधानिक धर्म होना चाहिए। क्या आप लोगों को अपने धर्मों का पालन करने से रोक सकते हैं? यह क्या है? मुकेश कुमार और मुकेश मनवीर सिंह ने यह याचिका दायर की थी और वे अपने मामले की पैरवी खुद कर रहे थे। याचिकाकर्ता ने पीठ को बताया था कि वह एक सामाजिक कार्यकर्ता है।
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