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SC: 'खनिजों पर राज्य के अधिकार' मामले में पुनर्विचार याचिका खारिज; बिहार जल संसाधन विभाग में 6000 भर्तियां

Fri, 04 Oct 2024 10:55 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई के अपने उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि खनिज अधिकारों पर कर लगाने की विधायी शक्ति राज्यों के पास है। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली नौ न्यायाधीशों की पीठ ने 8:1 के बहुमत से कहा कि फैसले में कोई त्रुटि नहीं दिखती। अदालत ने यह बात 24 सितंबर के अपने फैसले में कही है, जिसे हाल ही में अपलोड किया गया है। कोर्ट ने कहा, सुप्रीम कोर्ट रूल्स 2013 के तहत पुनर्विचार का कोई मामला स्थापित नहीं होता है। इसलिए पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज किया जाता है। शीर्ष कोर्ट ने मामले में खुली अदालत में सुनवाई के आवेदन को भी खारिज कर दिया। हालांकि, मूल फैसले से असहमत जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि पुनर्विचार याचिका के लिए आधार बनता है।
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सरकार की आलोचना वाले लेख के लिए पत्रकार पर केस नहीं होना चाहिए : कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार की आलोचना समझे जाने वाले लेख पर पत्रकारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज नहीं किए जाने चाहिए। जस्टिस ऋषिकेश रॉय और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने शुक्रवार को कहा कि लोकतांत्रिक देशों में अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाता है और पत्रकारों के अधिकारों को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत संरक्षित किया जाता है। पीठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की तरफ से जारी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश में प्रशासन में जातिगत व्यवस्था से संबंधित खबर पर राज्य में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की है। पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया और कहा कि इस दौरान याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी तरह की दंडात्कम कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके साथ ही मामले की सुनवाई चार हफ्ते बाद सूचीबद्ध कर दी।
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बिहार जल संसाधन विभाग में 6,000 जूनियर इंजीनियरों की होगी बहाली

बिहार के जल संसाधन विभाग में 6,000 से अधिक जूनियर इंजीनियरों की बहाली का रास्ता साफ हो गया है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने जूनियर इंजीनियरों के लिए 2019 की चयन प्रक्रिया को रद्द करने के बिहार सरकार के फैसले को अनुचित करार देते हुए उसे खारिज कर दिया। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि पूरी चयन प्रक्रिया को पूरा होने के बाद खत्म करना खेल खेले जाने के बाद खेल के नियमों को प्रभावी ढंग से बदलने के समान है, जो अस्वीकार्य है। पीठ ने बिहार तकनीकी सेवा आयोग (बीटीएससी) को निर्देश दिया कि वह पटना हाईकोर्ट के समक्ष उसकी तरफ से पेश नई चयन सूची के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाए।

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हाईकोर्ट के 19 अप्रैल, 2022 के आदेश को ध्यान में रखते हुए नई चयन सूची तैयार की जाए। नई चयन सूची में जहां तक संभव हो उन मेधावी उम्मीदवारों को भी शामिल किया जाएगा, जो पात्र थे, लेकिन केवल नियमों में 2017 के संशोधन के कारण अपात्र घोषित किए गए थे, जिसमें एआईसीटीई की ओर से मान्यता प्राप्त संस्थान की डिग्री को अनिवार्य बनाया गया था। साथ ही सभी सफल उम्मीदवारों को भी शामिल किया जाएगा।

शीर्ष अदालत ने बीटीसीएस को तीन महीने के भीतर सफल उम्मीदवारों की संशोधित चयन सूची तैयार करने का निर्देश दिया और राज्य सरकार को उसके बाद 30 दिनों के भीतर उन्हें नियुक्त करने का आदेश दिया। यह फैसला हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एक अपील पर आया, जिसने चयन प्रक्रिया रद्द करने के राज्य के फैसले पर ध्यान में रखते हुए नियुक्ति प्रक्रिया के खिलाफ लंबित मामलों को बंद कर दिया था।

असम में मटिया ट्रांजिट शिविर का औचक निरीक्षण का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने असम राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को विदेशियों के लिए बनाए गए मटिया ट्रांजिट शिविर में स्वच्छता और खान-पानी संबंधी सुविधाओं की जांच के लिए औचक निरीक्षण करने का निर्देश दिया है।

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के सचिव से शिविरों का निरीक्षण करने के लिए सही अधिकारियों को नामित करने को कहा है। ये अधिकारी बिना नोटिस दिए ही शिविरों का निरीक्षण करेंगे। अदालत ने प्राधिकरण से आज की तिथि से एक महीने के भीतर निरीक्षण रिपोर्ट भी दाखिल करने को कहा। साथ ही मामले की सुनवाई 4 नवंबर को सूचीबद्ध की।

26 जुलाई को मामले में सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने असम में विदेशियों के लिए बनाए गए एक हिरासत केंद्र की स्थिति को खेदजनक बताया था। कोर्ट ने कहा था कि इस केंद्र में पर्याप्त पानी की आपूर्ति, उचित शौचालय और स्वच्छता का अभाव है। पीठ असम में विदेशी घोषित किए गए लोगों के निर्वासन और उन्हें रखने के लिए बनाए गए हिरासत केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
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