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Supreme Court: 'हाथ से मैला ढोने की प्रथा खत्म हो, केंद्र-राज्य सुनिश्चित करें'; कोर्ट ने जारी किए दिशानिर्देश

Fri, 20 Oct 2023 11:43 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीठ ने निर्देश दिया कि सरकारी एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने के लिए समन्वय करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं न हों और इसके अलावा उच्च न्यायालयों को सीवर से होने वाली मौतों से संबंधित मामलों की निगरानी करने से न रोका जाए। यह फैसला एक जनहित याचिका पर आया।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश में सीवर सफाई के दौरान होने वाली मौत की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। जस्टिस एस. रवींद्र भट और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने सीवर में होने वाली मौतों और मामलों की निगरानी को लेकर कई दिशा-निर्देश जारी किए।

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मुआवजे के लेकर कही यह बात
कोर्ट ने कहा कि सरकारी अधिकारियों को सीवर सफाई के दौरान मरने वालों के परिजनों को 30 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा। सीवर सफाई के दौरान स्थायी दिव्यांगता का शिकार होने वाले व्यक्तियों को न्यूनतम मुआवजे के रूप में 20 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा।

फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति भट ने कहा कि यदि सफाईकर्मी अन्य दिव्यांगता से ग्रस्त है तो अधिकारियों को 10 लाख रुपये तक का भुगतान करना होगा। पीठ ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हाथ से मैला ढोने की प्रथा पूरी तरह खत्म हो जाए।”
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फैसला एक जनहित याचिका पर आया
कोर्ट ने कई निर्देश जारी किए, जिन्हें पढ़ा नहीं गया। पीठ ने निर्देश दिया कि सरकारी एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने के लिए समन्वय करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं न हों और इसके अलावा उच्च न्यायालयों को सीवर से होने वाली मौतों से संबंधित मामलों की निगरानी करने से न रोका जाए। यह फैसला एक जनहित याचिका पर आया।

लोकसभा में सरकार ने दी थी यह जानकारी
जुलाई 2022 में लोकसभा में उद्धृत सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में भारत में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान कम से कम 347 लोगों की मौत हुई, जिनमें से 40 प्रतिशत मौतें उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और दिल्ली में हुईं।

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