देश की अदालतों में यूं तो लाखों मुकदमे लंबित हैं लेकिन जमानत याचिकाओं पर सुनवाई और उनके निपटारे में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। शीर्ष अदालत की खंडपीठ ने कहा है कि देशभर के उच्च न्यायालयों में लंबे समय से लंबित जमानत याचिकाओं को जल्द सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। जस्टिस सीटी रवि कुमार और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट में जमानत की याचिकाओं को जल्द सूचीबद्ध करते हुए इनका तेजी से निपटारा करना चाहिए।
धोखाधड़ी के मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, शीर्ष अदालत पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि जमानत याचिका या अग्रिम जमानत की अपील 'निजी स्वतंत्रता' से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध करना चाहिए। अदालत ने हाईकोर्ट में जमानत याचिकाओं पर जल्दी सुनवाई और तेजी से निपटाने का आह्वान करते हुए कहा, सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को आदेश की प्रति मुहैया कराई जाएगी। 11 दिसंबर को पारित आदेश में शीर्ष अदालत ने कहा कि देशभर के हाईकोर्ट में शीर्ष अदालत के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे याचिकाकर्ताओं के मामले पर शीर्ष अदालत की खंडपीठ ने कहा, उच्चतम न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद जमानत के मामलों का तेजी से निपटारा नहीं किया जा रहा है। पीठ ने कहा कि बीते छह दिसंबर, 2023 को हाईकोर्ट में मामला सूचीबद्ध था। अदालत ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद मामले में केस डायरी पेश करने का निर्देश दिया। इस आदेश के साथ मुकदमे को एडमिट कर लिया गया और सुनवाई की अगली तारीख तय नहीं की गई।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, इस मामले को हाईकोर्ट में क्रोनोलॉजी के मुताबिक सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया। ऐसे हालात में मामले में अगली सुनवाई कब होगी, इसका केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा, उन्हें यह आदेश पारित करने में कोई संकोच नहीं है कि जमानत या अग्रिम जमानत के मामले में पारित 'ऐसे आदेशों' के कारण याचिका के निपटारे में देरी होने की पूरी गुंजाइश है। इन आदेशों के कारण 'नागरिक की निजी स्वतंत्रता' पर भी चोट पहुंचती है।
निजी स्वतंत्रता को बेहद अहम बताते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि अदालतों में ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा होना चाहिए। इसके लिए जल्द से जल्द सुनवाई की जानी चाहिए। अदालत ने चिंता जताई कि सुप्रीम कोर्ट कई बार निजी स्वतंत्रता को प्राथमिकता देने संबंधी आदेश पारित कर चुका है, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकल पीठ को अग्रिम जमानत याचिका को चार हफ्तों के भीतर निपटाने का निर्देश भी दिया।