सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अदालतों को किसी ऐसे व्यक्ति की मदद के लिए नहीं आना चाहिए जो जांच एजेंसियों से सहयोग नहीं करते और भाग जाते हैं। यूपी के बलिया में मार्च 2017 में दंगा करने के आरोप में एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिए। इस आरोपी की चार्जशीट नवंबर 2018 में ही दायर हो चुकी है, जिसमें उस पर दंगे के साथ-साथ हत्या के प्रयास का भी आरोप है।
अग्रिम जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी एक याचिका जून में खारिज की थी। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना ने कहा कि यह व्यक्ति लगातार जांच से भाग रहा है। हाईकोर्ट ने दिसंबर 2019 में उसे 30 दिन में आत्मसमर्पण करने के लिए कहा था। तब भी वह नहीं माना, उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।