सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के एक आदेश को दरकिनार करते हुए मंगलवार को कहा, अगर अधीनस्थ अवमानना करे तो इसके लिए उसके अधिकारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। याचिकाकर्ताओं ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें असम कृषि उत्पाद बाजार अधिनियम 1972 की धारा 21 को लेकर दिए एक आदेश की अवमानना का दोषी ठहराया गया था।
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जस्टिस एसके कॉल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने कहा, अवमानना के मामले में प्रतिनिधिक दायित्व का सिद्धांत लागूू नहीं हो सकता। कोर्ट की अवमानना अधिनियम 1971 के तहत अवमानना को जानबूझकर किसी आदेश की अवहेलना करने के तौर पर परिभाषित किया गया है। ऐेसे में अगर कोई अधीनस्थ अवमानना करता है तो इसके लिए उसके अधिकारी को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते। क्योंकि संभव हो कि उसे इस अवमानना के बारे में जानकारी ही न हो।
पीठ ने कहा, इसमें संदेह के मुकाबले सुबूत अधिक आवश्यक है, चूंकि अवमानना के मामले में अर्ध आपराधिक प्रवृत्ति की कार्यवाही होती है। पीठ ने कहा उक्त मामले में इस बात के प्रमाण नहीं हैं कि याचिकाकर्ताओं को उनके अधीनस्थ के बर्ताव की जानकारी थी या फिर उसमें इनकी मिलीभगत थी।