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हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले से नाराज सुप्रीम कोर्ट के जज बोले- पढ़कर मुझे बाम लगाना पड़ा

Sat, 13 Mar 2021 11:35 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media
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सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल हाईकोर्ट के फैसला लिखने के तरीके पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। मामले की सुनवाई कर रही पीठ में शामिल जज ने कहा, फैसला पढ़कर हमें टाइगर बाम लगाने की नौबत आ गई। फैसला सरल भाषा में होना चाहिए, उसमें थीसिस नहीं होनी चाहिए।

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस शाह ने कहा, मैं फैसले में कुछ नहीं समझ पाया। उसमें बड़े-बड़े वाक्य हैं। कुछ समझ में नहीं आया कि शुरू में क्या कहा गया था और अंत में क्या। एक कोमा दिखा जो अटपटे तरीके से लगा हुआ था। फैसले को पढ़ने के मुझे अपनी समझ पर शक होने लगा था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, फैसला सरल भाषा में होना चाहिए, जो आम आदमी को समझ आए
आखिरी पैराग्राफ पढ़ने के बाद तो मुझे टाइगर बाम लगाना पड़ा। वहीं, जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि फैसला ऐसा लिखा जाना चाहिए, जो आम आदमी को समझ आए। मैंने सुबह 10.10 बजे फैसले को पढ़ना शुरू किया और 10.55 बजे जब खत्म किया तो आप समझ नहीं सकते कि मैंने क्या महसूस किया।
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मेरी हालत अकल्पनीय है। जस्टिस कृष्णा अय्यर के फैसलों का जिक्र करते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि उनके फैसले सरल और स्पष्ट होते थे, जिसे पढ़ने वालों को समझने में कोई परेशानी नहीं होती थी।

दरअसल, यह मामला एक सरकारी कर्मचारी से जुड़ा है। केंद्र सरकार औद्योगिक न्यायाधिकरण (सीजीआईटी) ने कर्मचारी को कदाचार का दोषी मानते हुए दंडित किया था। इस फैसले को कर्मचारी ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सीजीआईटी के फैसले को सही ठहराया था। जिसके बाद कर्मचारी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

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