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SC: 'पहाड़ों के नाम पर कंकाल संरचनाएं होने का क्या फायदा', शीर्ष कोर्ट ने कहा- अरावली में अवैध खनन रोकना होगा

Thu, 02 May 2024 07:09 PM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन से संबंधित मामले में सुनवाई की। इस दौरान शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से कहा कि अरावली में अवैध खनन रोकना होगा। शीर्ष अदालत ने विकास के बीच संतुलन बनाने और पर्यावरण की सुरक्षा करने के लिए कहा।
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प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अरावली पर्वतमाला में अवैध खनन से संबंधित मामले में सुनवाई की। इस दौरान शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार से कहा कि अरावली में अवैध खनन रोकना होगा। शीर्ष अदालत ने विकास के बीच संतुलन बनाने और पर्यावरण की सुरक्षा करने के लिए कहा। साथ ही कहा कि राज्य सरकार दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करना सुनिश्चित करे।   

न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति अभय एस ओका की पीठ ने अवैध खनन मामले में सुनवाई की। इस दौरान पीठ ने कहा, अरावली में अवैध खनन को रोकना होगा। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस संबंध में आवश्यक कदम उठाए जाएं। अन्यथा, पहाड़ों के नाम पर केवल कंकाल संरचनाएं होने का क्या फायदा? सतत विकास के बीच संतुलन बनाना होगा और पर्यावरण की सुरक्षा करनी होगी। 

शीर्ष अदालत ने 2009 में छोटे खनिजों के खनन पर लगाया था पूर्ण प्रतिबंध

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बता दें कि शीर्ष अदालत अरवाली की पहाड़ियों में अवैध खनन मामले में सुनवाई कर रही है। अदालत ने 2009 में, पर्यावरण के प्रति संवेदनशील अरावली की पहाड़ियों में प्रमुख और छोटे खनिजों के खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। 

राजस्थान सरकार ने पहले अदालत से कहा था कि जहां तक खनन गतिविधियों का सवाल है, शीर्ष अदालत को अरावली पहाड़ियों और अरावली पर्वतमाला के बीच वर्गीकरण के मुद्दे पर निर्णय लेने की जरूरत है।  

राजस्थान सरकार को अवैध खनन रोकने को दिया था फ्री हैंड
जिसके बाद शीर्ष अदालत ने कहा, हम प्रथम दृष्टया महसूस कर रहे हैं कि यदि राज्य का मानना है कि अरावली रेंज में खनन गतिविधियां पर्यावरण हित के लिए भी हानिकारक हैं, तो राज्य सरकार को अरावली रेंज में खनन गतिविधियों को रोकने से कोई नहीं रोक सकता है। शीर्ष अदालत ने सरकार को अवैध खनन गतिविधियां रोकने के लिए फ्री हैंड दिया था।  

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