दो चरणों में होगा अपग्रेडेशन
वायुसेना के सूत्रों ने अमर उजाला को पुष्टि की है कि एचएएल अपनी नासिक फैसिलिटी में इन लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करेगा। एचएएल का नासिक डिवीजन पहले ही सुखोई-30एमकेआई लड़ाकू विमानों की ओवरहालिंग कर चुका है। और हाल ही में, रक्षा सचिव ने भारतीय वायु सेना को 100वां ओवरहाल किया हुआ सुखोई-30एमकेआई सौंपा था। लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन की तमाम दिक्कतों के बाद भी एचएएल ने हर साल 20 सुखोई-30एमकेआई फाइटर जेट्स की ओवरहालिंग की क्षमता हासिल की है। एचएएल ने 2014 में रिपेयर एंड ओवरहॉल (ROH) फैसिलिटी तैयार की थी। वहीं, यह अपग्रेड प्रोजेक्ट दो चरणों में होगा। पहले चरण में नए एवियोनिक्स और रडार लगाए जाएंगे, जबकि दूसरे चरण में फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम लगाए जाएंगे।
2055 तक बेधड़क करते रहेंगे काम
वायुसेना के सूत्रों ने बताया कि उनके पास फिलहाल 259 सुखोई एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू विमान हैं, जिन्हें 2000 के दशक की शुरुआत में रूस से खरीदा गया था। लगभग 20 साल बाद, अब इन फाइटर जेट्स को अपग्रेड किए जाने की जरूरत है, ताकि ये मौजूदा विमानों को टक्कर दे सकें। सुखोई के इस अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट पर तकरीबन 63,000 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। सुखोई को अपग्रेड करने की प्रक्रिया में इनमें नए रडार, मिशन कंट्रोल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर कैपेबिलिटी और एडवांस वेपन सिस्टम लगाए जाएंगे। सूत्रों का कहना है कि इस अपग्रेडेशन प्रोसेस से सुखोई-30एमकेआई फाइटर जेट्स की लाइफ बढ़ जाएगी, और ये 2055 तक बेधड़क काम करते रहेंगे। वहीं इन अपग्रेड्स के डेवलपमेंट, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन में मंजूरी की तारीख से सात साल तक का वक्त लग सकता है, जबकि सभी 84 जेटों के अपग्रेड्स के पूरा होने में आठ साल और लग सकते हैं।
सुखोई फाइटर से ही कंट्रोल होंगे ड्रोन
खास बात यह होगी कि अपग्रेडेशन प्रोसेसर में इन 84 सुखोई-30एमकेआई में मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग (MUM-T) टेक्नोलॉजी लगाई जाएगी। इसका फायदा यह होगा कि सुखोई के साथ हमलावर या निगरानी ड्रोंस भी उड़ान भर सकेंगे। यानी कि इन ड्रोंस को साथ उड़ रहे सुखोई फाइटर जेट्स से ही कंट्रोल किया जाएगा। इससे फायदा यह होगा कि जहां तक फाइटर जेट जा सकता है, उससे आगे ड्रोन से हमला या निगरानी कराई जा सकती है। सुखोई के साथ एडवांस ऑटोनॉमस ड्रोन्स या लॉयल विंगमैन यूसीएवी भी जोड़ें जाएंगे, इससे बॉर्डर पर निगरानी आसानी से की जा सकेगी। यह फीचर अभी तक पांचवी पीढ़ी के एयरक्राफ्ट्स में ही आता है और अब सुखोई भी इस सिस्टम से लैस होगा। हालांकि पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स में स्टेल्थ, सुपर क्रूज, सेंसर फ्यूजन और हथियारों का आंतरिक परिवहन शामिल जैसे फीचर भी होते हैं, लेकिन नए अपग्रेड में ये फीचर नहीं होंगे।
सुखोई-30एमकेआई में 51 सिस्टम्स होंगे अपग्रेड
इसके अलावा सुखोई-30एमकेआई में उत्तम एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) रडार लगाए जाएंगे, जिससे इसकी पहचान और ट्रैकिंग क्षमता में बढ़ोतरी होगी, साथ ही, लंबी दूरी की हवा से हवा में लड़ाई में यह कारगर साबित होगा। AESA रडार की रेंज ऑरिजनल सुखोई के साथ आने वाले बार्स पैसिव इलेक्ट्रॉनिक एरे (PESA) रडार से 1.5 से 1.7 गुना अधिक होगी। इनमें बीईएल के बनाए इन्फ्रारेड सर्च और ट्रैक सेंसर (IRST) भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा पुराने एनालॉग कॉकपिट की जगह लेटेस्ट फुल-डिजिटल ग्लास कॉकपिट लगाया जाएगा, जिसमें बड़ी टचस्क्रीन होंगी। डिजिटल कॉकपिट और वॉयस-एक्टिवेटेड सिस्टम से पायलट को जहाज को कंट्रोल में आसानी होगी। वहीं, प्रोसेसिंग पावर को हैंडल करने के लिए नया मिशन कंप्यूटर और अपग्रेडेड एवियोनिक्स सूट के साथ नए सेंसर्स और हथियार लगाए जाएंगे। कुल मिला कर सुखोई-30एमकेआई में 51 सिस्टम्स को अपग्रेड किया जाएगा, जिनमें 30 एचएएल और 13 डीआरडीओ और 8 निजी क्षेत्र की तरफ से किए जाएंगे।
एचएएल के लिए खुलेगा बाजार
सूत्रों ने बताया कि वहीं इन अपग्रेड्स से पूरी दुनिया में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) का रुतबा भी बढ़ेगा। इससे एचएएल के लिए नया बाजार भी बनेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा के बाद सुखोई जेट के अपग्रेडेशन, साथ मिल कर बनाने और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए रूस ने सहमति दे दी है। दोनों देशों ने मेक-इन-इंडिया कार्यक्रम के तहत रूस से आने वाले डिफेंस इक्विपमेंट्स के मेंटेनेंस और प्रोडक्शन के लिए साथ मिल कर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है। दुनिया भर में 600 से ज़्यादा सुखोई 27/30 फाइटर जेट बनाए जा चुके हैं। वियतनाम, मलेशिया, इंडोनेशिया और अल्जीरिया जैसे देशों के पास सुखोई फाइटर जेट्स हैं। वहीं सुखोई में इन अपग्रेडेशन से ये देश भी भारत का रुख करेंगे।