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Report: फेंसिंग तो दूर बांग्लादेश से लगी 865 KM सीमा पर रोशनी की व्यवस्था नहीं! फिर भी नहीं डिगते BSF के हौसले

सार

भारत बांग्लादेश के साथ 2216 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है। इसमें करीब 1640 किलोमीटर पर ही अभी तक फेंसिंग लग पाई है, जबकि 865 किलोमीटर के दायरे में रोशनी तक की व्यवस्था नहीं है। इसके चलते रोजना 150 से 200 लोग घुसपैठ करते हैं।
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BSF - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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बांग्लादेश से भारत में अभी भी घुसपैठ, पशु तस्करी और मानव तस्करी लगातार जारी है। भारत-बांग्लादेश की करीब 2216 किलोमीटर की लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी बीएसएफ पर है। भले ही घुसपैठ पर कुछ हद तक लगाम लगाने में कामयाब हो गए हों लेकिन अभी पूरी तरह से सफल नहीं हो पाए हैं। कई जगह भारत-बांग्लादेश की सीमा को खेतों में पिल्लर तो कहीं छोटी नदी बांटती है। रात के अंधेरे में कोई भी एक मिनट में घुसपैठ कर भारत की सीमा पार कर सकता है। अमर उजाला ने जानने की कोशिश की कि हमारे जवान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर किन कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद भारतीय जवानों का हौसला सातवें आसमान पर है।
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बॉर्डर के पास बसे गांव हैं समस्या
कई भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा ओपन हैं। यहां पर किसी तरह की फेंसिंग नहीं है। कई जगह खेत में लगे पिल्लर तो कई जगह नदी सीमा को बांटती हैं। खेतों में लगे पिल्लर के साथ एक छोटी तारबंदी है। जिसे घुसपैठिए लांघ कर पार कर सकते हैं। इसे पार करते ही घुसपैठिए भारतीय सीमा में दाखिल हो जाते हैं और कहीं पर भी छिप सकते हैं। इसी तरह से कई जगह नदी सीमा को बांटती है। कई जगह नदी की चौड़ाई महज तीस गज होगी। रात के अंधेरे में बांग्लादेश से बहुत आसानी से घुसपैठ और तस्करी होती है। क्योंकि भारत की सीमा के अंदर गांव सटे हुए हैं, इसलिए वे बहुत आसानी से गांवों में प्रवेश कर जाते हैं। इन गांवों को अगर सीमा से 150 गज दूर बसाया जाए तो बहुत हद तक तस्करी और घुसपैठ पर लगाम लगाई जा सकती है।

फेंसिंग और प्रकाश की व्यवस्था ना होना बड़ी चुनौती
भारत, बांग्लादेश के साथ करीब 2216 किलोमीटर की सीमा साझा करता है। जानकारी के मुताबिक अब तक करीब 1640 किलोमीटर पर ही फेंसिंग लगी है। बाकी का बॉर्डर बिल्कुल ओपन है। इसके साथ ही करीब 865 किलोमीटर पर प्रकाश की व्यवस्था नहीं है। यह सीमा की सुरक्षा पर लगे जवानों के लिए बड़ी चुनौती है। क्योंकि सर्दियों में यहां पर अंधेरा जल्दी हो जाता है। धीरे-धीरे कोहरा बढ़ता जाता है। घने कोहरे में दृश्यता लगभग दो से तीन मीटर की हो जाती है। ऐसे में जहां पर फेंसिंग नहीं है और ओपन सीमा है, वहां से बहुत आसानी से तस्कर और घुसपैठिए भारत में प्रवेश कर जाते हैं। बरसात के दिनों में यहां हालात और बदतर हो जाते हैं।
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हर रोज होती है 150 से 200 घुसपैठ
एक जानकारी के मुताबिक बांग्लादेश से रोजाना 150 से 200 घुसपैठिए और तस्कर भारत में प्रवेश करते हैं। इस बात की तस्दीक तो बीएसएफ के अधिकारी भी करते हैं। लेकिन यह संख्या इससे ज्यादा बताई जाती है। भारत और बांग्लादेश में दलालों का बड़ा गिरोह काम करता है, जो बांग्लादेश से भारत में घुसपैठ कराते हैं। बांग्लादेश से भारत में प्रवेश कराने के लिए दलाल प्रति व्यक्ति 15 से 30 हजार रुपए तक लेते हैं। भारत में बैठे दलाल इनके फर्जी दस्तावेज तैयार कराते हैं। भारत में प्रवेश करते ही ये दलाल उनको फर्जी आधार कार्ड मुहैया कराते हैं। बीएसएफ के अधिकारी कहते हैं कि स्थानीय पुलिस का भी उनको वैसा सहयोग नहीं मिल पाता, जितना कि मिलना चाहिए।

सुरक्षा में बेटियां भी मुस्तैद
भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर महिला जवान भी मुस्तैदी से सीमा की सुरक्षा में लगी हैं। सीमा पर तैनात गौतमी कहती हैं, बेटियां आज हर क्षेत्र में पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर देश की तरक्की में भागीदारी निभा रही हैं। देश की सीमाओं की सुरक्षा में भी बेटियां आ रही हैं। कहती हैं कि हर घर से एक बेटी को बीएसएफ ज्वाइन करना चाहिए।

चुनौतियों से बड़े हैं जवानों के हौसले: आर्य
दक्षिण बंगाल फ्रंटियर, बीएसएफ के जनसंपर्क अधिकारी, डीआईजी एके आर्य कहते हैं भारत-बांग्लादेश सीमा पर चुनौतियां हैं लेकिन हमारे जवानों हौसले उससे भी बड़े हैं। हर परिस्थिति से डटकर मुकालबला करते हैं और हर हाल में घुसपैठ और तस्करी को रोकने का प्रयास करते हैं। इसमें बीएसएफ काफी हद तक सफल भी हुआ है। अगर गांवों को पीछे ले जाया जाए, स्थानीय प्रसासन का सहयोग मिले, सीमा पर कंटीली ताल लगे और प्रकाश की व्यवस्था हो जाए तो बीएसएफ घुसपैठ और मानव तस्करी को शून्य पर ले आएगी।
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