फेसबुक पर हमेशा से पक्षपात और प्राइवेसी को लेकर आरोप लगते रहे हैं। लेकिन फेसबुक ने ऐसे मुद्दों पर खुलकर कभी बात नहीं की। वहीं फेसबुक की पूर्व कर्मचारी सोफी झांग उन चुनिंदा लोगों में से हैं जो फेसबुक के खिलाफ लगातार आवाज उठा रही हैं। सोफी झांग 2020 के दिल्ली चुनावों से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े मुद्दों को उजागर करने के बाद सुर्खियों में आई थीं।
झांग कई पूर्व फेसबुक कर्मचारियों और ठेकेदारों में से हैं जिन्होंने कहा है कि कंपनी की नीतियों और प्रबंधन से नुकसान हो रहा है। इस महीने की शुरुआत में, फ्रांसिस हाउगेन ने अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग को आंतरिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए एक शिकायत भेजी थी जो इन आरोपों में से मेल खाता है।
एक मीडिया चैनल को दिए साक्षात्कार में झांग ने कहा कि लोकतंत्र झूठ की बुनियाद पर नहीं टिक सकता। यह सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है कि फेसबुक सभी के साथ अच्छा और निष्पक्ष व्यवहार करे, देश पर दबाव बनाना है। आगे कहा कि यदि भारत के नागरिकों को लगता है कि किसी विशेष राजनीतिक दल के पक्ष में पक्षपातपूर्ण तरीके से सेंसर किया गया है, तो भारत के नागरिकों को अपनी आवाज सुनने की जरूरत है।
बता दें कि सोफी झांग ने अप्रैल में खुलासा किया था कि फेसबुक ने दिल्ली चुनाव से पहले कई फर्जी खातों को हटाने की योजना बनाई थी लेकिन जब उसे पता चला कि ऐसे नेटवर्क के पीछे भाजपा का एक राजनेता है तो वह रुक गया।
उन्होंने कहा कि भाजपा के लोकसभा सांसद द्वारा व्यक्तिगत रूप से चलाए जा रहे 50-60 खातों के नेटवर्क की पहचान की गई थी, लेकिन बार-बार चिंता जताए जाने के बावजूद, नेटवर्क को कभी नहीं हटाया गया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी से संबंधित एक नेटवर्क था, जो एक अलग राज्य में कांग्रेस का समर्थन करने वाले एक अलग सेल से भी जुड़ा था। इन अनधिकृत खातों को हटा दिया गया, फिर कांग्रेस से जुड़े दो नेटवर्क बंद कर दिए गए और एक बीजेपी को बंद कर दिया गया।
झांग ने कहा कि फर्जी खातों के ऐसे नेटवर्क किसी विशेष राजनीतिक दल या व्यक्ति को बढ़ावा देने के लिए बड़ी संख्या में स्वचालित सामग्री, पसंद, टिप्पणी और पोस्ट बनाने का काम करते हैं। उदाहरण के लिए, दिल्ली चुनाव के आसपास, कई खाते सामने आए, जिसमें कहा गया था कि हमने पहले नरेंद्र मोदी को वोट दिया था, लेकिन अब केजरीवाल को वोट देंगे। ये वास्तविक लोग नहीं थे।