पांच साल की बेटी के अपहरण, दुष्कर्म और फिर हत्या के मामले की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग वाली मां की अर्जी पर सीबीआई ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कानून में इसका प्रावधान है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, यह कोई राजनीतिक मामला नहीं, यहां एक बच्चे की मौत हुई है और संविधान नागरिक को इस तरह के मामले में केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग का अधिकार देता है।
जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने मेहता का पक्ष सुनने के बाद याचिकाकर्ता सौदामिनी साहू के वकील महेश जेठमलानी को विशेष अनुमति याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया।
जेठमलानी ने इस पर हामी भरी है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 17 अगस्त को सुनवाई करेगा। ओडिशा के नयागढ़ में रहने वाली सौदामिनी साहू की पांच साल की बेटी को पिछले साल 13 जुलाई को अगवा कर दुष्कर्म के बाद मार दिया गया था। उसका शव नौ दिन बाद 23 जुलाई को सौदामिनी के घर के पीछे पड़ा मिला था।
इसके बाद ओडिशा पुलिस ने 26 जुलाई को सौदामिनी और उसके पति को ही इस मामले में आरोपी बताकर हिरासत में लिया और 12 घंटों तक प्रताड़ित किया। हाईकोर्ट ने 11 अगस्त को इस मामले में दखल देकर दंपती को संरक्षण दिया था।
याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दावा किया कि उसके अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। राज्य पुलिस की जांच पर उसे भरोसा नहीं है और उसकी बेटी के साथ हैवानियत के मामले में केंद्रीय एजेंसी से जांच का निर्देश दिया जाए।