बाल श्रम को लेकर आयोजित हुए एक अंतरराष्ट्रीय परिसंवाद में वैश्विक नेताओं ने कहा कि दुनियाभर में लगभग तीन चौथाई बच्चे और कम आय वाले देशों में नब्बे फीसदी बच्चे बगैर किसी सामाजिक सुरक्षा के जीने को अभिशप्त हैं। अंतरराष्ट्रीय सहायता में सामाजिक सुरक्षा के लिए दी जाने वाली राशि में अत्यधिक कमी है।
नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी के संगठन ‘लॉरियेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्ड्रेन’ की ओर से एक अंतरराष्ट्रीय परिसंवाद 'फेयर शेयर टू इंड चाइल्ड लेबर-सरवाइवर्स एंड लीडर्स ऑन सोशल प्रोटेक्शन' का आयोजन किया गया। इसमें वैश्विक नेताओं ने कोविड-19 महामारी के दौरान पूरी दुनिया में बाल मजदूरी और बच्चों के शोषण बढ़ने पर चिंता जताई। वैश्विक नेताओं ने एक सुर में कहा कि हमें दुनियाभर के वंचित और हाशिये पर मौजूद बच्चों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी और विश्व समुदाय को गरीबी दूर करने के लिए तत्काल कारगर कदम उठाने होंगे। इस दौरान गरीब देशों के ऐसे बच्चों को संसाधनों का उचित हिस्सा देने और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक ‘वैश्विक सामाजिक सुरक्षा कोष’ की स्थापना करने की भी मांग की गई।
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इस परिसंवाद में आए महत्वपूर्ण सुझावों को कैलाश सत्यार्थी 28 सितंबर को गरीबी उन्मूलन के लिए नौकरियों और सामाजिक सुरक्षा पर होने वाली दुनिया के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार के प्रमुखों की बैठक में रखेंगे। इस बैठक का आयोजन संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की ओर से अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के साथ मिलकर किया जा रहा है। इसमें कोविड-19 महामारी के दौरान और उसके बाद दुनिया के विकास के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता के लिए की जाने वाली पहल पर बातचीत होगी।
ऑनलाइन माध्यम से हुए इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के महानिदेशक गाई राइडर, स्वीडन के प्रधानमंत्री स्टीफन लोफवेन, नार्वे के अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्री डाग इंगे उलस्टीन, बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी, तिमोर लेस्ते के पूर्व राष्ट्रपति व नोबेल शांति पुरस्कार विजेता जोस रामोस होर्ता मौजूद रहे। परिसंवाद को कई देशों के युवा और छात्र नेताओं सहित पूर्व बाल मजदूरों ने भी संबोधित किया। यह अतंरराष्ट्रीय परिसंवाद ऐसे समय पर आयोजित किया गया, जब न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र संघ की जनरल असेंबली चल रही है। इस मौके पर इस अंतरराष्ट्रीय मंच से संयुक्त राष्ट्र संघ की जनरल असेंबली में शामिल होने वाले तमाम देशों के नेताओं से अपील की गई की वे बच्चों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फौरन नीतियां और कार्यक्रम बनाएं।