अदालतों में सुरक्षा को लेकर हो सकते हैं बदलाव
मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि नवंबर 2019 के दौरान तीस हजारी कोर्ट में वकीलों और पुलिस कर्मियों के बीच भिड़ंत हुई थी। हालांकि वह एक पार्किंग विवाद था। आपसी कहासुनी इतनी ज्यादा बढ़ गई कि उसके बाद जो कुछ हुआ, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया था। यातायात पुलिस के साथ भी वकील बहस करते हुए देखे जा सकते हैं। पुलिस का इस मामले में कहना है, दरअसल वकील विशिष्ट व्यवहार या सुविधा चाहते हैं। अगर पुलिसकर्मी उन्हें वाहन के कागजात दिखाने के लिए कहता है, तो वे इसे अपना तिरस्कार समझने लगते हैं। इसी तरह अदालत परिसर में प्रवेश के दौरान भी वे अपनी जांच कराना ठीक नहीं समझते। कई वकील ऐसे भी होते हैं जो सामान्य प्रवेश द्वार से जांच करा कर अदालत में जाते हैं। संभावित है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट कोई संज्ञान ले।
इस बार दिल्ली की सभी अदालतों के सिक्योरिटी सिस्टम में बदलाव किए जा सकते हैं। इससे पहले भी अदालतों में इस तरह की घटनाएं हुई हैं। रोहिणी की अदालत में कई बदमाशों की हत्या हो चुकी है। हर घटना के बाद सिस्टम को दुरुस्त करने का दावा किया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद एक नई घटना हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट के वकील एपी सिंह कहते हैं, अदालतों के सिक्योरिटी सिस्टम को बदले जाने की जरूरत है। जज के सामने विचाराधीन कैदी की हत्या हो जाती है, यह घटना सिस्टम पर सवाल खड़े करने के लिए काफी है। मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार, चूंकि अदालतों की सुरक्षा को लेकर पुलिस अकेले अपने स्तर पर निर्णय नहीं ले सकती। ऐसे में न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों को साथ लेकर नए सिक्योरिटी सिस्टम पर बात की जाएगी। इंटेलिजेंस को दुरुस्त करने के अलावा अदालतों में सीसीटीवी व्यवस्था को लेकर भी कुछ बदलाव किए जाएंगे। वकील, स्टाफ एवं सादे कपड़ों में तैनात सुरक्षा कर्मी भी पुख्ता जांच के दायरे में आएं, इस तरह की व्यवस्था बनाई जाएगी।