सीएम एकनाथ शिंदे 2009 से शिवसेना (अविभाजित) उम्मीदवार के रूप में कोपरी-पचपाखड़ी निर्वाचन क्षेत्र से जीतते आ रहे हैं। 2019 के चुनावों में, उन्होंने कांग्रेस के संजय घाडीगांवकर को 89,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की कड़ी में राज्य के ठाणे जिले में एक रोमांचक चुनावी जंग की शुरुआत हो रही है। दरअसल उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ शिवसेना के दिग्गज नेता दिवंगत आनंद दिघे के भतीजे केदार दिघे को उम्मीदवार घोषित किया है।
विज्ञापन
ठाणे शिवसेना यूबीटी के अध्यक्ष हैं केदार दिघे
बता दें कि सीएम एकनाथ शिंदे दिवंगत आनंद दिघे को अपना राजनीतिक गुरु बताते हैं, उन्होंने बाल ठाकरे की विचारधारा के प्रति उनकी निष्ठा पर जोर दिया। शिवसेना (यूबीटी) की ठाणे जिला इकाई के प्रमुख केदार दिघे शिंदे के गृह निर्वाचन क्षेत्र कोपरी-पाचपाखाडी में उनके खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। शिवसेना (यूबीटी) ने बुधवार शाम को 20 नवंबर को होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए 65 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की।
2009 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं सीएम शिंदे
ठाणे के सांसद नरेश म्हास्के ने कहा कि सीएम शिंदे 28 अक्टूबर को अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं, जो चुनाव तैयारियों की देखरेख कर रहे हैं। बता दें कि सीएम एकनाथ शिंदे 2009 से शिवसेना (अविभाजित) उम्मीदवार के रूप में कोपरी-पचपाखड़ी निर्वाचन क्षेत्र से जीतते आ रहे हैं। 2019 के चुनावों में, उन्होंने कांग्रेस के संजय घाडीगांवकर को 89,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया।
विज्ञापन
कई अन्य विधानसभा सीटों पर कांटे की लड़ाई
पूर्व सांसद और उद्धव ठाकरे के वफादार राजन विचारे को ठाणे विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा भाजपा विधायक संजय केलकर के खिलाफ मैदान में उतारा गया है। इस निर्वाचन क्षेत्र में त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है, क्योंकि मनसे ने अविनाश जाधव को टिकट दिया है। शिवसेना (यूबीटी) ने ठाणे शहर की सीमा में ओवला-मजीवाड़ा क्षेत्र से पूर्व उप महापौर नरेश मानेरा को उम्मीदवार बनाया है, जिनका मुकाबला शिंदे सेना के विधायक प्रताप सरनाईक से है। ठाणे जिले के कल्याण ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र में शिवसेना (यूबीटी) के उम्मीदवार और पूर्व विधायक सुभाष भोईर का मुकाबला मनसे के मौजूदा विधायक राजू पाटिल से होगा। प्रताप सरनाईक, जिन्होंने जून 2022 में उद्धव के खिलाफ विद्रोह करने पर सीएम एकनाथ शिंदे का साथ दिया था, ने 2009, 2014 और 2019 में लगातार तीन बार ओवाला-मजीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता है।