शिवसेना नेता संजय निरूपम।
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उद्धव का भाजपा से संबंध तोड़ना था विश्वासघात- संजय निरूपम
अपनी प्रतिक्रिया में निरुपम ने कहा कि वह उद्धव ठाकरे ही थे जिन्होंने भाजपा से नाता तोड़ने के बाद कांग्रेस और अविभाजित राकांपा के साथ आ गए थे। असल में वह विश्वासघात था। यदि यह विश्वासघात नहीं था, तो यह किसी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एक राजनीतिक निर्णय था।
संजय राउत बोले- शंकराचार्य की बात पर आपत्ति जताने वालों को हिंदुत्व स्वीकार नहीं
वहीं, संजय निरूपम के बयान पर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने पलटवार किया है। संजय राउत ने कहा कि अगर किसी को शंकराचार्य की बात से कोई आपत्ति है, तो इसका मतलब यह है कि वह हिंदुत्व को स्वीकार नहीं करते हैं।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पहुंचे थे मातोश्री।
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उद्धव के साथ बैठक के बाद क्या बोले थे शंकराचार्च?
अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण ठुकराने वाले उत्तराखंड के ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को मातोश्री में उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) नेता विश्वासघात के शिकार हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की पूरी जनता विश्वासघात से दुखी है और यह हाल के लोकसभा चुनावों में भी दिखाई दिया। हमारा राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन हम विश्वासघात की बात कर रहे हैं, जो धर्म के अनुसार पाप है।
बता दें कि जून 2022 में उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। तब एकनाथ शिंदे ने बगावत कर दी थी और शिवसेना के ज्यादातर विधायकों के साथ मिलकर भाजपा के साथ आकर सरकार बनाई और मुख्यमंत्री बन गए थे।
'जो विश्वासघात को सहन करता है, वह हिंदू है'
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, 'उद्धव ने कहा कि वह हमारे आशीर्वाद के बाद जो भी करना होगा, करेंगे।' उन्होंने कहा कि विश्वासघात सबसे बड़ा पाप है। जो विश्वासघात करता है, वह हिंदू नहीं हो सकता। जो विश्वासघात को सहन करता है, वह हिंदू है। गौरतलब है कि शंकराचार्य ने इस साल की शुरुआत में अयोध्या में राम मंदिर प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण भी ठुकरा दिया था।