तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुईं शिखा मित्रा
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पश्चिम बंगाल के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष (दिवंगत) सोमेन मित्रा की पत्नी शिखा मित्रा रविवार को फिर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल हो गईं। इस दौरान शिखा मित्रा ने दावा किया कि भले ही मैंने 2014 में तृणमूल कांग्रेस विधायक के पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन मैंने आधिकारिक रूप से पार्टी कभी नहीं छोड़ी थी।
मित्रा ने कहा, 'मेरे पति को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था लेकिन मैंने सक्रिय राजनीति से एक ब्रेक लिया था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुझसे टीएमसी का सक्रिय कार्यकर्ता बनने का अनुरोध किया था। मैं उनकी सादगी और उनके व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हूं। मैंने सोचा था कि अगर सक्रिय राजनीति में वापसी करूंगी तो उनके साथ ही करूंगी।'
इस सवाल पर कि सात साल पहले उन्होंने टीएमसी विधायक के पद से इस्तीफा क्यों दिया था, मित्रा ने कहा कि उस समय कुछ मतभेद उत्पन्न हो गए थे, लेकिन अब उनका समाधान हो चुका है। मेरे पति के निधन के बाद ममता बनर्जी ने मुझे फोन किया था और उनके साथ मेरे संबंध हमेशा से अच्छे रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि भाजपा ने शिखा मित्रा को इस साल राज्य में हुए विधानसभा चुनावों में कोलकाता में चौरिंगी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन मित्रा ने चुनाव लड़ने से ही इनकार कर दिया था। इसे लेकर शिखा मित्रा ने आज कहा कि मैं हमेशा से यह मानती रही हूं कि भाजपा एक सांप्रदायिक पार्टी है।
यह मित्रा का व्यक्तिगत निर्णय: अधीर रंजन
इसे लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि मैं नहीं जानता कि क्यों शिखा मित्रा ने टीएमसी में शामिल होने के लिए कांग्रेस छोड़ी। वह पहले टीएमसी में थीं और फिर कांग्रेस से जुड़ गई थीं। लेकिन अब वह फिर सत्ताधारी दल में चली गई हैं। यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है। मैंने हमेशा उनका सम्मान किया है।