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महिला किसानों की आय में एसएचजी निभा रहे अहम भूमिका, आत्मनिर्भर और बाजार तक उत्पाद बेचने में होंगी सक्षम

Tue, 28 Jul 2020 05:58 AM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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देश में महिला कृषकों की जिंदगी को सामूहिक खेती नई दिशा और दशा दे रही है। अप्रैल तक के आंकड़ों के मुताबिक देश के 61 लाख महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की 690 लाख महिलाएं कृषि, हस्तशिल्प, हथकरघा और बागवानी जैसे कार्यों के माध्यम से आत्मनिर्भर होने का साथ कृषि के क्षेत्र में महिलाओं के वर्चस्व को भी लगातार बढ़ाने में मदद कर रही है।

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केंद्र सरकार की योजना इन महिला किसानों के 2022 तक आत्मनिर्भर बनाकर स्वयं अपने उत्पाद को बाजार तक लेकर जाने में सक्षम बनाने की है। इसके लिए विभिन्न योजनाओं में महिला किसानों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। वैसे तो पूरे देश में लेकिन उत्तर प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और बिहार में विशेषतौर पर महिलाएं कृषक मित्र बनकर पुरुष किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर स्वावलंबी बन रही हैं।  

केंद्र सरकार ने महिला किसानों के लिए विभिन्न स्कीमों में महिला किसानों खासतौर पर उनके सामूहिक कार्यकलापों के लिए अलग से छूट और कर्ज का प्रावधान किया है। जिससे उन्हें रोजमर्रा के काम में किसी तरह की दुश्वारियों का सामना न करना पड़े। 
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सामूहिक कार्यकलापों में महिला कृषक को सब्जी, फल और मौैसमी फसलों, पशु पालन, मधुमक्खी पालन, डेयरी, मशरुम की खेती के अलावा जैविक खाद के उत्पादन के लिए परांगत किया जा रहा है। इसके लिए ग्राम पंचायतों में महिलाओं को कृषक मित्र बनाकर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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