पूर्वी लद्दाख में सेना की निगरानी
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पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया में भारत और चीन के बीच सैन्य स्तर पर पांचवीं बार वार्ता की तैयारी अंतिम दौर में है। पिछले घटनाक्रम को देखते हुए इस दौर की बातचीत को अति संवेदनशील माना जा रहा है। वार्ता की तारीख तय करने से पहले भारत ठोस तस्दीक कर रहा है। इसके लिए तनावग्रस्त इलाके के स्थानीय कमांडर सेटेलाइट व अन्य तकनीक के जरिये निगरानी से इतर हर 48 से 72 घंटे में जमीनी हकीकत का जायजा ले रहे हैं। इसे रिकॉर्ड कर रहे हैं।
सैन्य सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के कोर कमांडरों के बीच संभवतः शुक्रवार को होने वाली बैठक में सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया पर बात होगी। पीछे हटने की सहमति के बावजूद चीन के अड़ियल रवैये के बीच पिछले सप्ताह डब्ल्यूएमसीसी स्तर की बातचीत में चीन ने एक बार फिर सेना पीछे हटाने को प्रतिबद्धता जताई। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर हालात इससे अलग हैं।
गलवां वैली के बाद हॉट स्प्रिंग और गोगरा से चीन से हटने की ठोस तस्दीक की जा रही है।
बीते दिनों खबर थी कि चीन तीनों जगहों से गुजरने वाले पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 से 17ए से डेढ़ किलोमीटर तक पीछे हट गया है। एलएसी के तीन किलोमीटर तक बफर जोन है जिसमें दोनों तरफ की सेना फिलहाल पेट्रोलिंग नहीं कर रही है।
अब होने वाली बातचीत में बफर जोन खत्म कर चीनी सेना के पांच अप्रैल से पहले की स्थिति बहाल करने पर बात होगी। इसके अलावा पेगोंग त्सो के फिंगर 5 से 8 के बीच का इलाका भी खाली करने पर आगे की बात होगी। सूत्रों के मुताबिक, डेपसांग पर मामला अभी भी फंसा हुआ है।