अप्रैल का महीना अपने अंत की ओर बढ़ रहा है, लेकिन बाजार में आम अभी भी बहुत कम दिखाई पड़ रहे हैं। आम के व्यापारियों और किसानों का कहना है कि कोरोना के कारण आम के किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है।
भारत आम के उत्पादन के मामले में पूरी दुनिया में नंबर एक है। लेकिन भारत के कुल आम के उत्पादन का लगभग 98 फीसदी घरेलू बाजार में ही खप जाता है। लगभग दो फीसदी उत्पाद अमेरिकी, यूरोपीय और मध्य पूर्व के बाजारों में सप्लाई किया जाता है।
आम व्यवसाय के प्रमोशन से जुड़े सचिन अवस्थी के मुताबिक, लेकिन इसके बाद भी इससे भारत को अच्छी विदेशी मुद्रा की आय होती है। लेकिन कोरोना के कारण इस समय पूरा अमेरिकी, यूरोपीय बाजार ध्वस्त हुआ पड़ा है।
मध्य-पूर्व के बाजारों के भी खुलने की नजदीक में कोई उम्मीद नहीं दिखाई पड़ रही है। इसका भारी खामियाजा भारत के आम व्यापारियों को भुगतना पड़ा है।
राजधानी के दिल्ली हाट और चंडीगढ़ के पंजौर गार्डेन में आमों के व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए हर साल मेले लगाए जाते हैं। इनमें आम की हजारों किस्में दिखाकर बाजार को प्रोत्साहित किया जाता है।
इन मेलों से आम व्यापारियों को देश से लेकर विदेश तक के बाजारों में नए-नए अवसर मिलते हैं, लेकिन इस वर्ष इन मेलों के आयोजन पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर संजय सिंह ने बताया कि अनाजों की खरीद के लिए बने फ़ूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की तरह फलों की खरीद के लिए किसी मैकेनिज्म का न होना इस सेक्टर के किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या है।
फसलों के उत्पादन के बाद उनकी बिक्री और आपूर्ति पूरी तरह बाजार के भरोसे काम करता है। इनके स्टोरिंग की उचित व्यवस्था हमारे देश में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जब बाजार में मांग होती है तो किसानों को अच्छा दाम मिल जाता है, लेकिन किसी संकट के समय उनकी सुरक्षा नहीं हो पाती।
अगर सरकार आमों की खरीद और बिक्री की सही व्यवस्था बना सके तो किसानों को नुकसान से बचाया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि अगर बाजार में किसी फल की मांग नहीं भी है, तो भी उसकी प्रोसेसिंग कर दूसरे उपयोगी उत्पादों में बदलने से उनको लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इससे उनके उपयोग की समयसीमा भी बढ़ाई जा सकेगी और किसानों को भी नुकसान से बचाया जा सकेगा। इसके लिए सरकार और प्राइवेट सेक्टर से निवेश किया जाना चाहिए।
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के मुताबिक कोरोना काल में भी भारतीय किसानों के उत्पादों को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
अभी तक 24 करोड़ टन हरी सब्जियां मुंबई बंदरगाह से फ्रैंकफर्ट, जर्मनी भेजी जा चुकी हैं। भारत में लगभग 200 आमों की अच्छी प्रजातियां पाई जाती हैं और इनके निर्यात पर भी जोर दिया जा रहा है।