अफजल खान की कब्र पर बढ़ाई गई सुरक्षा
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महाराष्ट्र में मंदिर-मस्जिद की सियासत तेज होती जा रही है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे द्वारा दी गई धमकी के बाद से सरकार अलर्ट हो गई है और जगह-जगह सुरक्षा बढ़ा रही है। ताजा मामला है अफजल खान की कब्र की जहां राज्य सरकार ने एहतियातन सुरक्षा बढ़ा दी है। कब्र को एक तरह से छावनी में तब्दील कर दी गई है और भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। वहीं सतारा के पुलिस अधीक्षक ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि अफजल खान की कब्र 2005 से प्रतिबंधित क्षेत्र है। अतिरिक्त बल का दौरा एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा था जिसमें वे सुरक्षा का आकलन करने के लिए संवेदनशील स्थानों का दौरा करते हैं। इस बार, मूल्यांकन यात्रा महाबलेश्वर में भी थी जहां उन्होंने प्रतापगढ़ का दौरा किया।
राज ठाकरे ने दी थी धमकी
बता दें कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना(MNS) के मुखिया राज ठाकरे ने धमकी देते हुए कहा था कि सतारा में अफजल खान की छोटी सी कब्र अब मस्जिद बन चुकी है। यदि राज्य सरकार इसे ध्वस्त नहीं करती है तो हमारे कार्यकर्ता इसे ध्वस्त करने का काम करेंगे। ठाकरे ने कहा था कि जो व्यक्ति हमारे छत्रपति शिवाजी महाराज की हत्या करने बीजापुर से आया था लेकिन हमारे महाराज ने उसे मार दिया था। अब प्रतापगढ़ किले के पास उसकी 6.5 फुट की कब्र आज 15 हजार फुट के इलाके में फैल चुकी है। इसका जिम्मेदार कौन है। अब यहां मस्जिद बनाई जा रही है, आखिर, इसे कौन फंडिंग कर रहा है। आखिर यह किसकी औलादें हैं?
औरंगजेब की कब्र को लेकर भी एमएनएस ने दी थी धमकी
बता दें कि इससे पहले एमएनएस प्रवक्ता गजानन काले ने कहा था कि शिवाजी की भूमि पर औरंगजेब की कब्र की क्या जरूरत है। इस कब्र को ध्वस्त कर देना चाहिए ताकि इनकी औलादें यहां माथा टेकने नहीं आएंगी। उन्होंने आगे कहा कि माननीय बाला साहेब ठाकरे ने भी यही कहा था, बाला साहेब की बातों को आप सुनेंगे या नहीं। आप औरंगाबाद का नाम बदलने की मांग पर पहले ही पलटी मार चुके हैं।
आरएएफ का दौरा नियमित अभ्यास का हिस्सा: पुलिस
अफजल खान के मकबरे पर पुलिस के ‘रेपिड एक्शन फोर्स’ (आरएएफ) द्वारा किया गया दौरा नियमित प्रक्रिया का हिस्सा था। संपर्क किए जाने पर पुलिस अधीक्षक अजय कुमार बंसल ने कहा कि आरएएफ द्वारा मकबरे का दौरा करना नियमित अभ्यास का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि अफजल खान का मकबरा 2005 से ही एक प्रतिबंधित क्षेत्र है, संवेदनशील इलाकों में इस तरह का दौरा हर दो साल में किया जाता है।