बांग्लादेश में ताजा हालातों से निपटने के लिए सोसायटी टू हार्मोनाइज एस्पिरेशंस फॉर रिस्पॉन्सिबल एंगेजमेंट (एसएचएआरई) द्वारा एक रिपोर्ट जारी की गई है। पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा है कि भारत को बांग्लादेश में सत्ता में बैठे लोगों के साथ बातचीत करने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बांग्लादेश में अस्थिरता का सीधा असर पूर्वोत्तर क्षेत्र के सुरक्षा परिदृश्य पर पड़ता है।
एसएचएआरई की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट
श्रृंगला ने एक कार्यक्रम में यह बात कही। इस दौरान बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति से निपटने को लेकर भारत के लिए उपलब्ध नीति विकल्पों के बारे में एक रिपोर्ट जारी की गई। केंद्र सरकार को दी जाने वाली यह रिपोर्ट थिंक टैंक सोसायटी टू हार्मोनाइज एस्पिरेशंस फॉर रिस्पॉन्सिबल एंगेजमेंट (एसएचएआरई) की ओर से तैयार की गई है। कार्यक्रम में एसएचएआरई से जुड़े सुरक्षा और रक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर पूर्वोत्तर भारत में सुरक्षा एवं विकास परियोजनाओं पर पड़ रहा है।
‘भारत की दो चिंताएं’
बांग्लादेश में भारत के पूर्व राजदूत ने कहा, हमारी दो मुख्य चिंताएं हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘पहली चिंता यह है कि बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल किसी भी तरह से भारत के हितों के खिलाफ नहीं किया जाना चाहिए। दूसरी चिंता की बात यह है कि पड़ोसी देश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।’
‘पीएमओ को सौंपी जाएगी रिपोर्ट’
कार्यक्रम में पूर्वी कमान के पूर्व जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल आरपी कलिता (सेवानिवृत्त) ने कहा कि रिपोर्ट कार्यान्वयन के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को सौंपी जाएगी। लद्दाख के पूर्व उपराज्यपाल आरके माथुर ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए ध्यान रखा गया है कि रिपोर्ट में की गई सिफारिशें का कार्यान्वयन किया जा सके। ये सभी वर्गों और विचारधाराओं के लिए स्वीकार्य हों।