सूखे से प्रभावित और पानी की समस्या से जूझ रहे राज्यों के लिए राहत की बात हो सकती है। भारत के भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) के वैज्ञानिकों ने ऐसा तरीका विकसित कर लिया है जिसके जरिए समुंदर के पानी को साफ करके पीने लायक बनाया जा सकेगा। यह नया तरीका पहले खोजे गए तरीकों से काफी सस्ता होगा।
भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक पानी को न्यूक्लियर एनर्जी की मदद से साफ करते हैं। तमिलनाडु के कलपाक्कम में शोधकर्ताओं ने इस प्लांट को विकसित किया है। वैज्ञानिकों ने बताया भाप को न्यूक्लियर रिएक्टर में मिलाकर पानी से नमक निकल जाएगा जिस से पानी साफ और पीने लायक हो जाएगा। कुडानकुलम प्लांट पर लोग साफ किए गए इस पानी का पीने और अन्य कार्यों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
बार्क के डायरेक्टर केएन व्यास ने बताया यह पहली बार नहीं है जब भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक पानी की कमी से जूझ रहे लोगाों के लिए आगे आया है। पानी साफ करने लिए ऐसे ही प्लांट पंजाब, पश्चिम बंगाल और राजस्थान सहित अन्य राज्यों में भी स्थापित किए गए हैं। उन्होंने आगे कहा बार्क ने दूषित भूजल को कम कीमत पर साफ करने का तरीका भी विकसित कर लिया है।
वैज्ञानिकों के इस असाधारण काम की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहना की और प्लांट पर खुद जाकर उन्हें बधाई दी। प्लांट पर मोदी ने पानी को साफ करने वाली साइकल को चलाया जिसके जरिए एनर्जी पैदा होती है। यह साइकल पानी को साफ करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों ने परिवार और आम लोगों के लिए कम कीमत पर पानी साफ करने का उपाय भी ढूंढ लिया है।