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कलकत्ता हाईकोर्ट : पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करने का निर्देश, जानें मामले पर अदालत की टिप्पणी

Fri, 22 Mar 2024 07:30 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

स्कूल भर्ती घोटाले मामले में कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने में देरी पर पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को कलकत्ता हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। अदालत राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग के पूर्व सचिव अशोक साहा, पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली और एसएससी के पूर्व अध्यक्ष सुबीर भट्टाचार्य की जमानत याचिकाओं पर संयुक्त रूप से सुनवाई कर रही था।
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कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : Social Media
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विस्तार
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स्कूल भर्ती घोटाले मामले में कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने में देरी पर पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को कलकत्ता हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। पूर्व लोक सेवकों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मुख्य सचिव को एक समयसीमा पर उसके समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि इस मामले में पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी समेत कई लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
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इस मामले पर हाईकोर्ट ने की सुनवाई 
अदालत राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग के पूर्व सचिव अशोक साहा, पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष कल्याणमय गांगुली और एसएससी के पूर्व अध्यक्ष सुबीर भट्टाचार्य की जमानत याचिकाओं पर संयुक्त रूप से सुनवाई कर रही थी।

जांच हो गई पूरी, लेकिन अभी भी हिरासत में- याचिकाकर्ता
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें मामले में एक साल से अधिक समय से हिरासत में हैं, जांच पूरी हो चुकी है। अदालत के पहले के निर्देशों का जवाब देते हुए, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अशोक चक्रवर्ती ने सीबीआई निदेशक का प्रतिनिधित्व करते हुए अदालत को बताया कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है।
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अदालत ने मामले पर कही यह बात 
हालांकि, बार-बार अपील के बावजूद, राज्य के मुख्य सचिव ने अभी तक अशोक साहा, सुबीरेश भट्टाचार्य और कल्याणमय गांगुली जैसे अन्य पूर्व लोक सेवकों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर फैसला नहीं किया है। अदालत ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष ने सत्तारूढ़ दल के विधायक जीवन कृष्ण साहा के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रभारी मंत्री और स्कूल सेवा आयोग के प्रमुखों और अन्य लोगों के बीच चयन प्रक्रिया के परिणामों में छेड़छाड़ करने और अयोग्य व्यक्तियों को सार्वजनिक पदों पर नियुक्त करने की साजिश रची गई थी।

अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराध और भ्रष्टाचार से जुड़े अपराध एक अलग श्रेणी में आते हैं। उनकी गंभीरता को केवल कानून में निर्धारित अधिकतम सजा के नजरिए से नहीं देखा जा सकता है, बल्कि इसका सार्वजनिक प्रशासन और मामलों में लोगों के विश्वास पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है। 
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