पश्चिम बंगाल के स्कूलों को टैक्स के भुगतान से छूट मिलेगी। राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने शुक्रवार को 'कोलकाता नगर निगम (संशोधन) विधेयक 2023' को मंजूरी दे दी। विधेयक के कानून बनने पर स्कूलों को संपत्ति कर के भुगतान से छूट मिल जाएगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 (प. बंगाल अधिनियम 1980 का LIX) में संशोधन बेहद जरूरी था। इसका मकसद सरकार द्वारा प्रशासित या सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों वाली भूमि या भवनों को छूट देने का प्रावधान बनाना है।
कानून बनने का रास्ता लगभग छह महीने बाद हुआ साफ
यह विधेयक पश्चिम बंगाल विधानसभा में पिछले साल सितंबर महीने में ही पारित हुआ था। अब करीब छह महीने बाद इसे राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है। इस कानून के अस्तित्व में आने के बाद राज्य सरकार को संपत्ति कर (Peoperty Tax) के भुगतान से छूट मिलेगी।
10 करोड़ रुपये से अधिक का बिल पेश करते हैं स्कूल
विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद नगरपालिका मामलों और शहरी विकास मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा, यह कानून केएमसी के खाते में स्पष्टता और पारदर्शिता लाएगा। उन्होंने कहा कि हर साल सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल 10 करोड़ रुपये से भी अधिक के अवास्तविक संपत्ति कर बिल (unrealisable property tax bills) प्रस्तुत करते हैं।
1900 से अधिक स्कूलों पर असर पड़ेगा
कोलकाता में संपत्ति कर के दायरे में आने वाले स्कूलों के बारे में एक अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के क्षेत्राधिकार में 1329 प्राथमिक स्कूल हैं। 556 माध्यमिक विद्यालय और 78 कॉलेजों को मिलाकर केएमसी के दायरे में कुल 1963 कैंपस आते हैं।
संपत्ति कर के भुगतान का कोई प्रावधान नहीं; बकाया हैं पैसे
पश्चिम बंगाल सरकार के मुताबिक इन संस्थानों के कर्मचारियों का वेतन उसकी जम्मेदारी हैं। सरकार अन्य खर्चों को भी कवर करती है। हालांकि, वर्तमान में संपत्ति कर के भुगतान का कोई प्रावधान नहीं है। इस कारण बकाया टैक्स का बड़ा हिस्सा भी इससे ही जुड़ा है।