चुनावी बॉन्ड की वैधता पर 31 को सुनवाई करेगी पांच सदस्यीय पीठ
राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदा मिलने के मामले को अब सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ सुनवाई करेगी। कोर्ट ने पांच जजों की पीठ द्वारा इस मामले पर सुनवाई के लिए 30 अक्तूबर की तारीख भी मुकर्रर की थी। इस मामले पर चार जनहित याचिकाएं लंबित हैं। इनमें से एक याचिकाकर्ता ने मार्च में कहा था कि चुनावी बॉन्ड के माध्यम से राजनीतिक दलों को अब तक 12,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है और इसकी दो-तिहाई राशि एक प्रमुख राजनीतिक दल को गई है। दावा किया जाता है कि राजनीतिक वित्तपोषण में पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत चुनावी बॉन्ड को दलों को दिए जाने वाले नकद चंदे के विकल्प के रूप में पेश किया गया है।
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की संविधान पीठ चार याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इसममें कांग्रेस नेता जया ठाकुर और सीपीआई(एम) की भी याचिका शामिल है। शीर्ष अदालत ने 16 अक्तूबर को कहा था कि उठाए गए मुद्दे के महत्व को देखते हुए और भारत के संविधान के अनुच्छेद 145(4) (एससी की प्रक्रिया को विनियमित करने के नियमों से संबंधित) के संबंध में मामले को कम से कम पांच जजों की पीठ के समक्ष रखा जाना चाहिए।
शरद और उद्धव ठाकरे गुट की याचिकाओं पर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के शरद पवार गुट और उद्धव ठाकरे गुट की याचिकाओं पर सोमवार यानी 30 अक्तूबर को सुनवाई करेगा। दोनों गुटों द्वारा दाखिल इन याचिकाओं में कुछ विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर को निर्देश देने की मांग की गई है।