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सुप्रीम कोर्ट: 1998 के फैसले पर पुनर्विचार करेगी सात जजों की पीठ, पूर्व पीएम नरसिंह राव से जुड़ा है मामला

Mon, 25 Sep 2023 11:38 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली सात न्यायाधीशों की पीठ शीर्ष अदालत के 1998 के उस फैसले पर पुनर्विचार करेगी, जिसमें सांसदों और विधायकों को संसद व राज्य विधानसभाओं में भाषण देने या मतदान करने के लिए रिश्वत लेने पर मुकदमे से छूट दी गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली सात न्यायाधीशों की पीठ शीर्ष अदालत के 1998 के उस फैसले पर पुनर्विचार करेगी, जिसमें सांसदों और विधायकों को संसद व राज्य विधानसभाओं में भाषण देने या मतदान करने के लिए रिश्वत लेने पर मुकदमे से छूट दी गई थी।

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शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किए गए नोटिस में कहा गया है कि पीठ चार अक्तूबर को मामले की सुनवाई करेगी।
 

नोटिस में कहा गया है, 'मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति चंद्रचूड़,  न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना, न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश, न्यायमूर्ति पामिदिघण्तम श्री नरसिम्हा, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की संविधान पीठ का गठन चार अक्तूबर (बुधवार) को सीता सोरेन बनाम भारत संघ शीर्षक वाली आपराधिक अपील संख्या 451/2019 पर सुनवाई के लिए किया जाता है।'
 

झारखंड मुक्ति मोर्चा रिश्वत कांड के करीब 25 साल बाद शीर्ष अदालत ने 20 सितंबर को 1998 के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने पर सहमति जताते हुए कहा था कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जिसका 'राजनीति की नैतिकता' पर महत्वपूर्ण असर है। शीर्ष अदालत की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने इस मुद्दे को सात न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के पास भेजने का फैसला किया था।
 

शीर्ष अदालत ने 1998 में पीवी नरसिम्हा राव बनाम सीबीआई मामले में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले में कहा था कि सांसदों को संविधान के अनुच्छेद 105 (2) और अनुच्छेद 194 (2) के मुताबिक सदन के अंदर दिए गए किसी भी भाषण और वोट के लिए आपराधिक मुकदमे के खिलाफ संविधान के तहत छूट प्राप्त है।
 
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संविधान के अनुच्छेद 105 (2) में कहा गया है कि सांसद संसद या उसकी किसी समिति में कही गई किसी भी बात या डाले गए किसी भी वोट के संबंध में अदालत में किसी भी कार्यवाही के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। अनुच्छेद 194 (2) के तहत विधायकों के लिए एक समान प्रावधान मौजूद है।
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