न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने अपने 10 अगस्त 2021 के उस आदेश को भी संशोधित किया है, जिसमें उसने कहा था कि न्यायिक अधिकारियों को अदालत की अनुमति के बिना नहीं बदला जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार सभी उच्च न्यायालयों से उन सभी सांसदों-विधायकों के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है जिनके खिलाफ पांच वर्षों से ज्यादा समय से आपराधिक मामले लंबित हैं।
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न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमा कोहली की पीठ ने अपने 10 अगस्त 2021 के उस आदेश को भी संशोधित किया है, जिसमें उसने कहा था कि उन न्यायिक अधिकारियों को अदालत की अनुमति के बिना नहीं बदला जाना चाहिए, जो कानून निर्माताओं (सांसद-विधायक) के खिलाफ सुनवाई कर रहे हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसरिया की इस दलील पर भी गौर किया कि न्यायिक अधिकारियों द्वारा विशेष अदालत के प्रभार से मुक्त होने के लिए कई आवेदन दाखिल किए जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें पदोन्नत या स्थानांतरित किया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त 2021 के आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को यह अधिकार होगा कि वह ऐसे न्यायिक अधिकारियों के तबादलों का आदेश दे सकेंगे। कोर्ट ने कहा कि सभी उच्च न्यायालयों को चार सप्ताह के भीतर एक हलफनामा दाखिल करना होगा और सांसदों-विधायकों के खिलाफ पांच साल से ज्यादा समय से लंबित मामलों की संख्या और उनके शीघ्र निपटारे के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताना होगा।
अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने साल 2016 में एक जनहित याचिका दायर की थी जिसमें उन्होंने उन मामलों में सुनवाई तेज करने की मांग की थी जिनमें आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए जाने पर राजनेताओं के चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाने के अलावा सांसदों-विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों को निपटाने की बात कही गई थी।