सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी लाभ के लिए सत्तारूढ़ दल द्वारा लोक सेवकों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने वकील प्रशांत भूषण की दलीलों पर गौर किया। पीठ ने कहा कि प्रचार हित याचिका पर सुनवाई करने की उनकी कोई इच्छा नहीं है।
लोक सेवकों का इस्तेमाल करना चाहता
भूषण ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है, जिसमें सत्तारूढ़ दल आगामी चुनावों में लाभ पाने के उद्देश्य से अपने काम के प्रचार के लिए लोक सेवकों का इस्तेमाल करना चाहता है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि याचिका को यह मानकर खारिज किया जा रहा है कि इसे वापस ले लिया गया है। अगर याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट का रुख करना है, तो वह कर सकता है।
नौ अक्तूबर के पत्र को रद्द करने की मांग
ईएएस सरमा और जगदीप एस छोकर ने जनहित याचिका दायर की है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के रक्षा खातों के नियंत्रकों को रक्षा मंत्रालय के रक्षा लेखा महानियंत्रक के नौ अक्टूबर, 2023 के पत्र को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि उक्त विवादित पत्र, दिनांक 09.10.2020 को रक्षा मंत्रालय के आदेश के साथ पढ़ा जा सकता है, जिसमें वार्षिक अवकाश पर गए सैनिकों को सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में समय बिताने का निर्देश दिया है।
जनहित याचिका में की गई मांग?
जनहित याचिका में केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के 17 अक्तूबर के कार्यालय ज्ञापन पर भी निशाना साधा गया। डीओपीटी ने फैसला किया कि भारत सरकार के पिछले नौ वर्षों की उपलब्धियों के प्रदर्शन/उत्सव के लिए भारत सरकार के संयुक्त सचिवों/निदेशकों/उप सचिवों को 'जिला रथप्रभारी (विशेष अधिकारी)' के रूप में तैनात करना 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' के माध्यम से, 20 नवंबर, 2023 से 25 जनवरी, 2024 तक पूरे देश में आयोजित करने का प्रस्ताव है।
लोक सेवक का उपयोग किसी भी अभियान...
पत्र और कार्यालय ज्ञापन को रद्द करने की मांग के अलावा, याचिका में यह घोषणा करने की भी मांग की गई है कि केंद्र या राज्य में कोई भी सत्तारूढ़ दल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी लोक सेवक का उपयोग किसी भी अभियान या प्रचार के लिए नहीं कर सकता है जो उसके लाभ के लिए है। उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए लोक सेवकों को तैनात करने की सरकार की कार्रवाई न केवल कई सेवा नियमों का उल्लंघन करती है, बल्कि 'समान अवसर के साथ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, जो लोकतंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा है' को भी बाधित करती है।