सुप्रीम कोर्ट सोमवार को भारत में बच्चे को गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया, जिसमें कहा गया था कि देश में सालाना केवल 4000 बच्चे गोद लिए जाते हैं। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने एक एनजीओ द टेंपल ऑफ हीलिंग की ओर से पेश याचिकाकर्ता पीयूष सक्सेना के कहने के बाद केंद्र को नोटिस जारी किया कि उन्होंने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई प्रस्तुतियां दी थीं लेकिन इस संबंध में अभी तक कुछ नहीं हुआ।
पीठ ने कहा, हम नोटिस जारी करेंगे और देखेंगे कि इस मुद्दे पर सरकार का क्या कहना है। सक्सेना ने कहा कि सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सालाना केवल 4000 बच्चे गोद लिए जाते हैं लेकिन पिछले साल तक हमारे देश में तीन करोड़ अनाथ बच्चे थे। कई बांझ दंपति हैं जो बच्चा पालना चाहते हैं। लोग पर्याप्त शिक्षित नहीं हैं इसलिए यह योजना आयकर योजना पर आधारित होनी चाहिए जो 16 साल पहले जारी की गई थी। पिछले साल महामारी के दौरान मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की थी जिसमें मानदंडों में ढील दी गई थी लेकिन इसे नियमित किया जाना चाहिए।
पीठ ने कहा कि वह एक निकाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और इसका गोद लेने से क्या लेना-देना है। इस पर सक्सेना ने कहा, मैं 'द टेंपल ऑफ हीलिंग' में सचिव हूं और हम दान स्वीकार नहीं करते हैं या कोई पैसा नहीं लेते हैं और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से विभिन्न बीमारियों का इलाज करते हैं। गोद लेने संबंधी प्रक्रिया 2006 की आयकर की योजना के साथ सामंजस्य बैठाकर आगे बढ़ाई जाती है। उन्होंने कहा कि वे भावी माता-पिता को गोद लेने के लिए आवश्यक बोझिल कागजी कार्रवाई को पूरा करने में मदद कर सकते हैं।