पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने अपनी नई बुक में दावा किया है कि अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने 'हिंदू राष्ट्र' के विचार को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही धर्मनिरपेक्ष तंत्र में धार्मिक रूप से संवेदनशील मामलों को व्यावहारिक रूप से सुलझाने की शीर्ष कोर्ट की क्षमता को बढ़ाया है।
खुर्शीद की नई बुक 'Sunrise Over Ayodhya: Nationhood in Our Times' सोमवार को जारी की गई। इसमें 2019 के सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या मामले में ऐतिहासिक फैसले को लेकर विस्तार से चर्चा की गई है। खुर्शीद ने लिखा कि सर्वोच्च अदालत ने न्यायिक सिद्धांतों के इस्तेमाल व सभ्यता के रिसते जख्मों को भरने के लिए नाजुक संतुलन कायम किया।
कांग्रेस नेता ने लिखा है कि हो सकता है सुप्रीम कोर्ट को हिंदुओं का पक्ष, मुस्लिमों की तुलना में मामूली रूप से ज्यादा प्रेरक लगा हो, लेकिन उसने बहुत बड़ा काम किया और मुस्लिमों को इस बात के लिए प्रेरित किया कि यह पुनर्मिलन का वक्त है न कि पराजय का। मुस्लिमों ने हमेशा कोर्ट का फैसला मानने के प्रति अपनी वचनबद्धता दर्शाई थी, अब उनके समक्ष अवसर था कि वे अनुग्रह और उदारता दिखाएं और सच्ची राष्ट्रीय एकता कायम रखने में योगदान दें।
9 नवंबर 2019 को प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अयोध्या में उस स्थान पर राम मंदिर के निर्माण की इजाजत दे दी थी, जहां कभी बाबरी मस्जिद थी। शीर्ष कोर्ट ने इसके साथ ही केंद्र सरकार से कहा था कि वह सुन्नी वक्फ बोर्ड को नई मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में पांच एकड़ जमीन दे।
इसके साथ ही अयोध्या का बहुचर्चित रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद खत्म हो गया। इससे पूर्व 6 दिसंबर 1992 को मुगल काल में बनी बाबरी मस्जिद को कारसेवकों ने गिरा दिया था। इसके साथ देश के कई हिस्सों में दंगे भड़क उठे थे।
खुर्शीद ने बुक में आगे लिखा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत के धर्मनिरपेक्ष चरित्र की एक बार फिर पुष्टि हुई है। यह वह सच्चाई है जो इस फैसले के पहले से थी। इसके अलावा, सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ भूमि देने का निर्देश एक इशारा था, जिसने इस बात को रेखांकित किया कि कोर्ट और राष्ट्र सभी नागरिकों को समान मानते हैं। 354 पेज की इस बुक में वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने लंबे चले अयोध्या विवाद के न्यायिक इतिहास व ब्योरे को पेश किया है और यह बताया है कि इस फैसले से कैसे भारत के एक धर्मनिरपेक्ष समाज होने की पुन: पुष्टि हुई है।
निष्कर्ष रूप में खुर्शीद ने लिखा है कि यह वक्त ही बताएगा कि क्या सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले के माध्यम से भव्य पुनर्मिलन की नींव रखी है या बहुसंख्यकों की ताकत बनाम अधिकार के तनाव का कायम रखा है या यह दोनों का मिश्रण है।
सलमान खुर्शीद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील भी हैं। उन्होंने कई किताबें लिखी हैं, जिनमें 'एट होम इन इंडिया', 'ट्रिपल तलाक' और 'द इनविजिबल मुस्लिम' शामिल हैं।