फेडरेशन के अध्यक्ष वीपी मिश्रा और महासचिव प्रेमचंद के अनुसार, उन्होंने केंद्र सरकार को चेताने के लिए कॉलिंग अटेंशन अभियान शुरू किया है। सरकारी कर्मियों के वेतन भत्तों में कटौती करना एक अनैतिक और मनमाना कदम है।
सरकारी अधिकारियों और कर्मियों ने तय मापदंडों के अनुसार पीएम केयर्स फंड में अपना योगदान दिया है। केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले राजस्व विभाग ने गत माह 17 अप्रैल को एक आदेश जारी किया था।
इसमें कहा गया है कि राजस्व विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी हर माह यानी मार्च 2021 तक पीएम केयर्स फंड में एक दिन का वेतन जमा कराएंगे। इस फंड के जरिए सरकार को कोरोना के खिलाफ लड़ाई में मदद दी जाएगी।
आदेशों में यह भी कहा गया था कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी इस बाबत एतराज जताता है तो उसके एम्प्लॉयमेंट कोड सहित वह जानकारी विभाग को दे दें। इतना ही नहीं, केंद्र ने अपने सभी मंत्रालयों और विभागों में होने वाले कई तरह के सरकारी खर्च पर पाबंदी लगा दी थी।
इसका असर 1.13 करोड़ (कर्मी-पेंशनर) लोगों पर पड़ा है। पहली तिमाही में वेतन तो मिलेगा, लेकिन एलटीए, पदोन्नति का एरियर, एडवांस, लीव एनकैशमेंट (छुट्टी के बदले पैसा) एवं दूसरे भत्ते आदि पर रोक रहेगी।
कार्यालय का खर्च, मसलन खाना पीना, पार्टी का आयोजन और सामान खरीदना जैसी गतिविधियों के लिए भी बजट नहीं मिलेगा। सामान्य काल में पास होने वाले कई बिलों पर रोक लगाई जा रही है। जिस मद से सेलरी मिलती है, उसमें खर्च की सीमा 30 से घटाकर 20 फीसदी कर दी गई है।
मंत्रालय या विभाग के कुल बजट में नॉन सैलरी हेड के खर्च पर भी पाबंदी लगी है। इसके तहत अब खरीददारी की सीमा 10 फीसदी निर्धारित कर दी गई है। फिलहाल ये पाबंदियां पहले फाइनेंस क्वार्टर 'अप्रैल से जून' में लागू रहेंगी।
हालांकि सभी केंद्रीय कर्मियों का महंगाई भत्ता और पेंशनरों की महंगाई राहत पर जुलाई 2021 तक रोक दी गई है। केंद्र सरकार ने अपने मंत्रियों और सांसदों की सैलरी में भी 30 फीसदी तक की कटौती कर दी थी।
इसके फौरन बाद एमपीएलएडी स्कीम को भी दो साल के लिए निलंबित कर दिया गया था। इसमें सरकार का मकसद कोरोना से लड़ाई के लिए अधिकांश फंड एकत्रित करना है। एमपीएलएडीइस स्कीम को निलंबित करने से सरकार ने करीब 8,000 करोड़ रुपये बचाए हैं।
ज्वाइंट कंसल्टेशन मशीनरी फॉर सेंटर गवर्नमेंट एम्प्लॉई के सचिव शिव गोपाल मिश्रा कहते हैं कि सरकारी कर्मचारी आज कोरोना की लड़ाई में अपना योगदान दे रहे हैं। केंद्र सरकार को कर्मियों के वेतन-भत्तों में कटौती करने से पहले उन्हें विश्वास में लेना चाहिए था।
मिश्रा ने इस बाबत कैबिनेट सचिव को एक पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि 48 लाख कर्मी, जिनमें सेना और रेल कर्मचारी भी शामिल हैं, इन सबने एक दिन का वेतन पीएम केयर्स फंड में जमा कराया है।
कई विभागों में कर्मियों ने अपनी इच्छानुसार इससे ज्यादा राशि भी दान की है। अब इनकी सैलरी या भत्ते काटकर इन्हें परेशान नहीं करना चाहिए। कई विभागों के कर्मियों ने अपने-अपने तरीके से जरूरतमंद लोगों की मदद की है। सरकार को महंगाई भत्ते पर लगी रोक तुरंत हटानी चाहिए।