सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को रूसी आक्रमण के बीच यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को निकालने की मांग वाली एक याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गया। शीर्ष अदालत ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से आग्रह किया कि वे यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की मदद के लिए अपने पद का इस्तेमाल करें। चीफ जस्टिस एनवी रमण ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि इस तरह के 1000 छात्र हैं, लेकिन कुछ यहां आ गए हैं। हम ना नहीं कह सकते हैं, कृपया कुछ करें।
दरअसल इससे पहले चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील एएम डार ने यूक्रेन में फंसे छात्रों के मामले का उल्लेख किया। वकील ने कहा कि यूक्रेन-रोमानिया सीमा में भारतीयों को निकालने के संबंध में यह एक नई याचिका दाखिल की गई है। वकील ने कहा कि फंसे हुए लोगों में ज्यादातर लड़कियां हैं।
चीफ जस्टिस ने वकील से पूछा कि कोर्ट क्या कर सकता है? क्या मैं रूस के राष्ट्रपति को युद्ध रोकने के लिए निर्देश दे सकता हूं? चीफ जस्टिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर मैंने कुछ वीडियो देखा जिसमें यह पूछा जा रहा है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) क्या कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की देखभाल के लिए कदम उठा रही है।
जिस पर वकील डार ने कहा कि रोमानिया की सीमा पर भारतीय छात्र बेहद कठिन परिस्थितियों में हैं। वहां अत्यधिक ठंड है। ज्यादातर लड़कियां हैं। वे यूक्रेन की सीमा पर करीब छह दिनों से बिना भोजन के फंसी हुई हैं। इस पर चीफ जस्टिस ने वकील को प्रतीक्षा करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की सहायता मांगेगी। चीफ जस्टिस ने कहा कि हमारी सहानुभूति उनके साथ है। हम अटॉर्नी जनरल से हमारी सहायता करने के लिए कहेंगे।
बाद में अटॉर्नी जनरल जब एक अन्य मामले में पेश हो रहे थे, तब चीफ जस्टिस ने अटॉर्नी जनरल को इस मामले से अवगत कराया और उनसे आवश्यक मदद करने को कहा। अटॉर्नी जनरल ने पूछा कि क्या जिन छात्रों के संबंध में याचिका दायर की गई है। उन्होंने यूक्रेन की सीमा पार की है? तब याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील एएम डार ने कहा कि उन्होंने पार नहीं किया है।
एजी ने कहा कि भारत सरकार ने एक मंत्री को रोमानिया भेजा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यूक्रेन की सीमा पार करने के बाद वे वापस आ जाएं। इसलिए मैं जानना चाहता हूं कि समस्या क्या है। डार ने कहा कि वे अभी तक पार नहीं हुए हैं। जहां वे हैं, वह यूक्रेन में है। उन्हें यात्रा करने की अनुमति नहीं थी, यही समस्या है। तब चीफ जस्टिस ने वकील डार से याचिका की प्रति अटॉर्नी जनरल को देने को कहा। उन्होंने अटॉर्नी जनरल से कहा कि कृपया देखें कि आप क्या मदद कर सकते हैं।