कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि यूक्रेन से भारतीयों को लाने की प्रक्रिया भले ही देरी से शुरू हुई हो, लेकिन अब यह सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। रूस-यूक्रेन जंग के बीच फंसे हजारों भारतीयों के मुद्दे पर बृहस्पतिवार को विदेश मंत्रालय (एमईए ) की सलाहकार समिति की बैठक हुई।
इस बैठक में राहुल ने कहा, सरकार ने भारतीयों को निकालने के लिए देरी से कदम उठाया और एडवाइजरी भ्रमित करने वाली थी। वहीं, विदेश मंत्रालय ने यह साफ किया कि छात्रों के मन में शिक्षा की स्थिति को लेकर संदेह बना हुआ है और यूक्रेन सरकार स्थिति पर आश्वासन दे रही है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन के घटनाक्रम पर विदेश मंत्रालय सलाहकार समिति की बैठक हाल ही में पूरी की। मुद्दे के रणनीतिक और मानवीय पहलुओं पर अच्छी चर्चा हुई। यूक्रेन से सभी भारतीयों को वापस लाने के प्रयास में सहयोग का मजबूत और सर्वसम्मत संदेश दिया गया। ‘ऑपरेशन गंगा’ के तहत युद्धग्रस्त देश में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जा रहा है।
संसदीय समिति की बैठक में कांग्रेस ने क्या कहा
संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में कांग्रेस सांसदों ने कहा कि हम सब के लिए देशहित सर्वोपरि है। हमारे सुझाव सकारात्मक दृष्टिकोण से दिए जा रहे हैं। बैठक में राहुल गांधी, आनंद शर्मा और शशि थरूर ने कहा कि यूक्रेन में फंसे छात्रों को लेकर सरकार ने समय से प्रभावी कदम नहीं उठाए। हमें अपने लोगों को यूक्रेन से निकालने के लिए शायद और जल्दी कार्रवाई करनी चाहिए थी। सरकार की ओर से शुरू में जारी एडवाइजरी भी स्पष्ट न होकर भ्रमित कर रही थीं। जिससे ज्यादातर छात्र वहां रुके रहे।
बैठक में कहा गया कि भारत सरकार को देश की गुडविल का इस्तेमाल कर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करनी चाहिए थी। राहुल गांधी ने कहा कि फिलहाल हमें प्राथमिकता पर यूक्रेन से अपने छात्रों को सुरक्षित निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति हमेशा चुनौतीपूर्ण होती है। हालांकि उन्होंने रेस्क्यू अभियान में शामिल अधिकारियों और मिशन की तारीफ भी की। कांग्रेसी सांसदों ने ये भी कहा कि ऐसी युद्ध की स्थिति में हम पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण नहीं अपना सकते हैं । भारत के लिए ये आवश्यक है कि हम निष्पक्ष बने रहें ताकि हमारे लोग सुरक्षित निकल पाएं।