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होसबाले की दो टूक: संघ आरक्षण का प्रबल समर्थक, समाज में असमानता रहने तक जारी रहे व्यवस्था

Tue, 10 Aug 2021 07:16 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

संघ के सह सर कार्यवाह दत्तात्रय होसबाले ने आरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। पिछली बार संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण की समीक्षा का बयान दिया था। उस पर बवाल पैदा हो गया था। 
 
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दत्तात्रेय होसबोले - फोटो : Twitter
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विस्तार
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आरक्षण को लेकर आरएसएस का बड़ा बयान आया है। सह सर कार्यवाह दत्तात्रय होसबाले ने कहा है कि संघ आरक्षण का प्रबल समर्थक है। वह समाज में असमानता खत्म होने तक आरक्षण जारी रखने के पक्ष में है। पूर्व में बिहार चुनाव के पहले संघ प्रमुख के आरक्षण को लेकर आए बयान से बवाल मच गया था। ऐसे में आगामी यूपी व अन्य राज्यों के चुनाव के मद्देनजर होसबाले की यह साफगोई अहम है। 

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होसबाले ने मंगलवार को कहा कि समाज का कोई वर्ग जब तक असमानता महसूस करे, तब तक उसे आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि दलितों के इतिहास के बगैर भारत का इतिहास अपूर्ण रहेगा। दलित सामाजिक बदलाव में अग्रणी रहे हैं। 

होसबाले 'मैकर्स आफ मॉडर्न दलित हिस्ट्री' पुस्तक के विमोचन के मौके पर इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास दलितों से अलग नहीं है। उनके इतिहास के बगैर भारत का इतिहास अपूर्ण रहेगा। आरक्षण की चर्चा करते हुए संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि वह और उनका संगठन आरएसएस आरक्षण का कट्टर समर्थक है। होसबाले ने कहा कि सामाजिक सद्भाव व सामाजिक न्याय हमोर लिए राजनीतिक रणनीति नहीं है। ये दोनों हमारे लिए आस्था की चीजें हैं। 
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सह सर कार्यवाह होसबाले ने कहा कि भारत के लिए आरक्षण ऐतिहासिक जरूरत है। यह तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक समाज को कोई खास वर्ग असमानता महसूस करे। उन्होंने कहा कि आरक्षण एक 'सकारात्मक कार्रवाई' है। समाज के सभी तबकों के बीच आरक्षण व सौहार्द साथ साथ चलना चाहिए। सामाजिक बदलाव लाने वाली हस्तियों को दलित नेता कहना अनुचित होगा, क्योंकि वे पूरे समाज के नेता थे। 

होसबाले ने कहा कि जब हम समाज के अजा व जजा वर्ग के विभिन्न पहलुओं की बात करते हैं तो निश्चित रूप से आरक्षण की बात भी सामने आती है। मेरा संगठन और मैं दशकों से इसके प्रबल समर्थक रहे हैं। जब भी कई कई परिसरों में आरक्षण विरोधी आयोजन होते हैं तो हम प्रस्ताव पारित करते हैं। हमने पटना में आरक्षण के समर्थन में एक सेमिनार भी आयोजित किया था। 

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