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संघ का मुखपत्र: इंफोसिस पर उठाए गए सवाल, लिखा- कहीं राष्ट्र विरोधी ताकतें इसके जरिये देश को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहीं

Sat, 04 Sep 2021 10:37 PM IST
अभिषेक दीक्षित एजेंसी, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

संघ के मुखपत्र पांचजन्य ने आईटी और जीएसटी पोर्टलों में गड़बड़ी को लेकर आईटी कंपनी पर निशाना साधा है। वहीं, कांग्रेस ने इस लेख को देश विरोधी बताया है।
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इंफोसिस के सीईओ सलिल पारेख हाल ही में इनकम टैक्स पोर्टल के मुद्दे पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिले थे। - फोटो : ANI
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विस्तार
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जीएसटी और आयकर पोर्टलों में आ रही दिक्कतों को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुखपत्र कहे जाने वाले साप्ताहिक पांचजन्य ने इंफोसिस पर निशाना साधा है। पांचजन्य ने अपने ताजा संस्करण में चार पेज की कवर स्टोरी के जरिये इस दिग्गज घरेलू सॉफ्टवेयर कंपनी द्वारा तैयार इन पोर्टलों में गड़बड़ी पर तीखे सवाल उठाए है। साप्ताहिक अखबार ने सवाल किया है कि कहीं इसके जरिये राष्ट्रविरोधी ताकतें भारतीय आर्थिक हितों को नुकसान तो नहीं पहुंचा रही हैं। उधर, कांग्रेस ने पांचजन्य के लेख को देश विरोधी बताते हुए इसकी आलोचना की है।
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इंफोसिस ‘साख और आघात’ नाम की इस कवर स्टोरी में कंपनी के संस्थापक नारायण मूर्ति की तस्वीर कवर पेज पर लगाई गई है। इस स्टोरी में बंगलूरू स्थित कंपनी पर तीखा हमला बोलते हुए उसके लिए ‘ऊंची दुकान, फीका पकवान’ मुहावरा इस्तेमाल किया है। हालांकि लेख में इंफोसिस और राष्ट्रविरोधी ताकतों के गठजोड़ का कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया है। लेकिन इसमें कहा गया है कि इंफोसिस बहुत बार नक्सलियों, वामपंथियों और टुकड़े-टुकड़े गैंग की मदद करने की आरोपी रही है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल
उधर, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक ट्वीट में इस लेख को देश विरोधी करार दिया। उन्होंने कहा, यह आरोप को सरकार के सिर से हटाने का प्रयास है और पूरी तरह निंदा के लायक है। रमेश ने कहा, आरएसएस के प्रकाशन में इंफोसिस पर झूठा हमला अपमानजनक और वास्तव में राष्ट्र विरोधी है। इंफोसिस जैसी कंपनियों ने भारत को और दुनिया में देश की स्थिति को बदला है।
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टैक्स पोर्टलों में गड़बड़ी राष्ट्रीय चिंता का विषय : साप्ताहिक
हालांकि पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर ने अपने साप्ताहिक के लेख को सही ठहराया है। उन्होंने कहा, इंफोसिस एक बड़ी कंपनी है और सरकार की तरफ से यह बेहद अहम काम उसे उसकी साख के आधार पर दिखाया गया था। इन टैक्स पोर्टलों में गड़बड़ी राष्ट्रीय चिंता का विषय है और इसके जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
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