राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संयुक्त महासचिव अरुण कुमार का कहना है, बाबरी ध्वंस का कारण था कि हिंदुओं को लगता था, विवादित स्थल पर मंदिर निर्माण के लिए कानूनी प्रक्रिया के नाम पर उन्हें ठगा जा रहा है।
किताब ‘सबके राम’ का विमोचन करने के बाद उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए चलाए गए 38 साल लंबे आंदोलन का परिणाम सकारात्मक और रचनात्मक रहा। इसका एक मकसद समाज में बदलाव लाना भी था। बाबरी ध्वंस त्वरित प्रतिक्रिया नहीं थी।
उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने हिंदू समाज को जगाया। इससे यह धारणा भी टूटी कि हिंदू समाज कायर हैै और जाति, भाषा, धर्म जैसे मतभेदों के कारण किसी भी मुद्दे पर एक नहीं हो सकता। इस आंदोलन ने इस बात को भी झुठलाया कि पश्चिमी शिक्षा और मूल्यों के कारण 20-25 साल से नई पीढ़ी में अपने धर्म के प्रति आस्था कम है।
हिंदू कायर नहीं
अरुण कुमार ने कहा कि राम मंदिर के लिए आंदोलन अद्भुत था, इसकी वजह से हिंदू जागे और इस धारणा को भी बदल दिया कि हिंदू कायर हैं। साथ ही कहा कि लोगों को लगता था हिंदू एक साथ नहीं आ सकते। यह एक आम धारणा थी कि हिंदू समाज विभिन्न जातियों, भाषाओं, क्षेत्रों, छोटे समूहों और उनके संबंधित मतभेदों के कारण एक साथ नहीं आ सकता है।
अपनी बात रखते हुए अरुण कुमार ने कहा कि आंदोलन का नेतृत्व करने वालों के मन में यह दृढ़ था कि यह एक देश, एक व्यक्ति एक संस्कृति है, लोगों द्वारा अलग-अलग पूजा के तरीकों के बावजूद, विभिन्न भाषाएं बोली जाती हैं। वे एक सामंजस्यपूर्ण समाज के सपने के साथ काम कर रहे थे।
25 सालों में सबके दिल में राम को स्थापित करना है
आगे कहा कि अयोध्या में शानदार राम मंदिर बन रहा है और इसका निर्माण तेजी से चल रहा है। राम मंदिर का निर्माण हिंदू समाज की उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा करेगा लेकिन आने वाले 25 सालों में अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि हमको आने वाले 25 सालों में सबके दिल में राम को स्थापित करना है।