केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की गतिविधियों में सरकारी कर्मचारियों के भाग लेने पर लगे 58 साल पुराने प्रतिबंध को हटा लिया है। अब सरकारी कर्मी आरएसएस की गतिविधियों में शामिल हो सकेंगे। इस फैसले को लेकर जहां कांग्रेस और भाजपा में जुबानी जंग छिड़ गई है। वहीं, आरएसएस ने इस फैसले का स्वागत किया है। संघ का कहना है कि इस फैसले से देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होगी।
अतीत की सरकारों पर हमला
इतना ही नहीं, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने पिछली सरकारों पर अतीत में प्रतिबंध लगाकर अपने स्वयं के राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने का भी आरोप लगाया। उसका कहना है कि अतीत में सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों को आरएसएस के साथ जुड़ने से रोकने के कई उदाहरण हैं।
फैसला उचित: आंबेकर
प्रतिबंध हटाए जाने संबंधी एक सरकारी आदेश के सार्वजनिक होने और कई विपक्षी नेताओं द्वारा इस कदम की आलोचना किए जाने के एक दिन बाद आरएसएस प्रवक्ता सुनील आंबेकर ने कहा, 'सरकार का मौजूदा फैसला उचित है और भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली को मजबूत करता है।'
पिछले 99 वर्षों से संघ समाज की सेवा में लगा
आंबेकर ने आगे कहा, 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 99 वर्षों से सतत राष्ट्र के पुनर्निर्माण एवं समाज की सेवा में निरंतर लगा हुआ है। राष्ट्रीय सुरक्षा, एकता-अखंडता एवं प्राकृतिक आपदा के समय में समाज को साथ लेकर संघ के योगदान के चलते समय-समय पर देश के विभिन्न प्रकार के नेतृत्व ने संघ की भूमिका की प्रशंसा भी की है।'
निराधार ही लगाया गया था प्रतिबंध
उन्होंने आगे कहा, 'अपने राजनीतिक स्वार्थों के चलते तत्कालीन सरकार द्वारा शासकीय कर्मचारियों को संघ जैसे रचनात्मक संगठन की गतिविधियों में भाग लेने के लिए निराधार ही प्रतिबंधित किया गया था। शासन का वर्तमान निर्णय समुचित है और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को पुष्ट करने वाला है।'