कदाचार के कारण निलंबन को टाला नहीं जा सकता
धनखड़ ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार को भी पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने राज्यसभा के सभापति ने उच्च सदन से सदस्यों के निलंबन को उचित ठहराते हुए कहा कि उनके कदाचार के चरम स्तर के कारण इसे टाला नहीं जा सकता था और वह उस अवसर पर खड़े हुए थे, जब लोकतंत्र के मंदिर को अपवित्र किया गया था।
धनखड़ ने मुद्दे के राजनीतिकरण पर जताई चिंता
पत्र में धनखड़ ने संसद में सुरक्षा उल्लंघन के घटना के मुद्दे पर 'सामूहिक चिंता' दिखाने के बजाय 'राजनीतिकरण' की व्यापक धारणा पर भी अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने कहा, 'जब लोकतंत्र के मंदिर को अपवित्र किया गया तो निश्चित रूप से आप चिंतित वरिष्ठ सांसद के रूप में सहमत होंगे कि सभापति इस मौके पर आगे आए हैं।'
पवार ने धनखड़ को लिखा था पत्र
शरद पवार ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर संसद में सुरक्षा में चूक पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग करते हुए तख्तियां दिखाने और नारे लगाने वाले सदस्यों को सदन से निलंबित करने के मुद्दे पर उनके हस्तक्षेप की मांग की थी। पवार को लिखे पत्र में आगे कहा गया है कि आपके और अन्य नेताओं में इस मुद्दे के राजनीतिकरण की व्यापक धारणा है और सामूहिक चिंता से निपटने के लिए सामूहिक संकल्प को प्रतिबिंबित करने की जरूरत से पूरी तरह से दूर है।
राकांपा प्रमखु शरद पवार ने 19 दिसंबर को राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखा था और उसी दिन पत्र का जवाब दिया गया था। धनखड़ ने कहा,'अत्यधिक कदाचार और सभापति के निर्देशों की लगातार अवहेलना के कारण सदस्यों को निलंबित किया जा सकता है।'
वहीं, राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे ने भी धनखड़ को पत्र खरगे ने भी धनखड़ को पत्र लिखालिखा है। पत्र में उन्होंने लिखा, 'मैं आपका ध्यान इस ओर दिलाना चाहता हूं कि संसद की सुरक्षा में सेंध के मुद्दे के समाधान के लिए राज्यसभा के नियमों और प्रक्रिया के प्रासंगिक नियमों के तहत कई नोटिस दिए गए थे। विपक्षी दल इस मामले पर सार्थक चर्चा के लिए तैयार थे। मैं खुली चर्चा और बातचीत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराना चाहता हूं। मैं इन चिंताओं को रचनात्मक रूप से संबोधित करने के लिए निकट भविष्य में पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तारीख और समय पर आपके साथ एक बैठक में शामिल होने के लिए तैयार हूं।'