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वेब मीडिया ने बढ़ाया हिंदी का दायरा

Tue, 20 Sep 2016 01:47 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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यह वेब मीडिया का ही करिश्मा है कि आज घर बैठे हम ऑनलाइन हिंदी की अनेक किताबें पढ़ सकते हैं। हिंदी में अपने विचार लिखकर उन्हें एक बड़े तबके तक पहुंचा सकते हैं। न्यू मीडिया यानि वेब मीडिया के प्रति लोगों का आकर्षण प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। आज की स्थिति में वेब और भाषा एक दूसरे के अहम सहयोगी माने जा सकते हैं।
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ये सच है कि वेब के असर से हिंदी के स्वरूप में इसके मूल स्वरूप से भिन्नता है। वेब मीडिया के प्रयोगों के बावजूद हिंदी के अस्तित्व पर कोई संकट नही है। दूसरी भाषाओँ के कुछ शब्दों के प्रयोग से ही हिंदी वेब के लायक बनी अन्यथा अपने मूल स्वरुप में हिंदी एक दायरे तक सीमित होकर रह जाती।

वेब मीडिया में हिंदी का विकास सन 2000 में यूनिकोड के आने के बाद 2003 में शुरू हुआ। 2003 में हिंदी में इन्टरनेट सर्च और ई मेल की सुविधा की शुरुआत हुई। देखा जाए तो हिंदी के विकास में यह एक मील का पत्थर साबित हुआ। 21वीं सदी के पहले दशक में ही गूगल न्यूज़, गूगल ट्रांसलेट तथा ऑनलाइन फोनेटिक टाइपिंग जैसे साधनों ने वेब की दुनिया में हिंदी के विकास में महत्वपूर्ण सहायता की।
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हिंदी के प्रचार-प्रसार में सोशल मीडिया का महत्वपूर्ण योगदान

आज बड़े-बड़े हिंदी के लेखक जो भी लिखते हैं उसे एक सीमित दायरे से हटकर एक बड़े तबके तक पहुंचाने में सफल हैं। कोई भी किताब छपती है उसके प्रमोशन से लेकर लॉन्चिंग तक वेब मीडिया बड़ा योगदान दे रहा है। किताब के किसी छोटे से अंश को सोशल साइट्स पर शेयर करने से लोगों को उसे पढ़ने के प्रति दिलचस्पी होती है।

इलेक्ट्रॉनिक संचार – माध्यम और कंप्यूटर आदि के उपयोग में हिंदी ने अपनी एक खास जगह बना ली है। इससे एक तरफ इन माध्यमों से हिंदी का प्रसार हो रहा है, तो दूसरी तरफ हिंदी का अपना बाजार भी बन रहा है। हिंदी का अपना बाजार बनने से अंतराष्ट्रीय भूमिका मजबूत हो रही है।

आज लगभग हर वो व्यक्ति जो हिंदी में लिखना पसंद करता है, उसके लिए ब्लॉग एक सबसे कारगर माध्यम है। हजारों की संख्या में हिंदी ब्लॉग वेब में मौजूद हैं। अपनी अभिव्यक्ति को अपनी भाषा में प्रदर्शित करने का सुख वेब मीडिया में ब्लॉगिंग के माध्यम से प्राप्त होता है। 
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हिंदी की पकड़ इंटरनेट पर दिन व दिन मजबूत हो रही है

आज जो हम अपनी छोटी से छोटी बातों को पोस्ट करके हजारों लाइक-कमेंट्स पाते हैं इससे पता चलता है कि हमारी पहुंच क्या है। एक समय था जब बात पहुंचाने के लिए कई दिन-महीने लगत थे। लेकिन अब ऐसा नही है। वेब मीडिया ने इन सभी सीमाओं को तोड़ा है।

पहले हमें इंटरनेट पर कुछ भी सर्च करने के लिए उसे अंग्रेजी में ही टाइप करना पड़ता था लेकिन, अब ऐसा नही है। जो भी सर्च करना है हिंदी में लिखने पर उपलब्ध हो जाता है। दिन व दिन सर्च रिजल्ट बढ़ रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हिंदी की पकड़ इंटरनेट पर दिन व दिन मजबूत हो रही है। 
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