वकीलों और पुलिस में मारपीट
अदालत परिसर में वकील अपने सामने पुलिस के जवानों की सुरक्षा संबंधी सलाह भी नहीं सुनते। इस बात में कई बार वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच टकराव हो चुका है। इसके पहले राजधानी दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट और कड़कड़डूमा कोर्ट परिसर में इसी तरह के मुद्दे पर वकीलों और पुलिसकर्मियों में भारी टकराव हो चुका है। अंत में उच्च स्तरीय पुलिस अधिकारियों के बीच-बचाव के बाद दोनों पक्षों के बीच मामला शांत कराया गया था। इन घटनाओं का असर यही हुआ है कि सुरक्षाकर्मी केवल वकील ही नहीं, बल्कि उनके साथ आने वाले अन्य लोगों की चेकिंग भी सही ढंग से नहीं करते।
सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था अपनाते तो न होती ये घटना
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विनी कुमार दुबे ने अमर उजाला को बताया कि सर्वोच्च अदालत परिसर में प्रवेश करने से पहले हर वकील को चेकिंग से होकर गुजरना पड़ता है। वह कितना भी बड़ा वकील क्यों न हो, सभी को सुरक्षा व्यवस्था से गुजरना अनिवार्य है। वकीलों के पास आने वाले लोगों को भी वकील के द्वारा पास बनाकर दिए जाने के बाद पास की जांच करने के बाद ही लोगों को अदालत परिसर में प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में सुरक्षा में चूक होने की कोई संभावना नहीं बचती और सुरक्षा बनी रहती है। अश्विनी कुमार दुबे ने कहा कि यदि निचली अदालतों में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई जाए तो जितेंद्र गोगी हत्याकांड जैसी घटनाओं को टाला जा सकता था।
हाईकोर्ट में भी सुरक्षा कड़ी
दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ता दर्शन शर्मा ने बताया कि दिल्ली की उच्च न्यायालय में भी लगभग सुप्रीम कोर्ट की तरह की सुरक्षा व्यवस्था है। यहां प्रवेश करने वाले सभी वकीलों को मेटल डिटेक्टर से होकर गुजरना पड़ता है। वकीलों के पास आने वाले लोगों को भी बिना वकील के द्वारा पास जारी किए अदालत परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाता। वकीलों या अन्य लोगों को अपने साथ लाए सामान को भी सुरक्षा जांच पास करना पड़ता है जिससे सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं होती। दिल्ली हाईकोर्ट में भी यह सुरक्षा हाईकोर्ट के पास हुए एक बम ब्लास्ट के बाद अपनाई गई थी।
वकीलों ने किया विरोध
हालांकि, रोहिणी कोर्ट के वकीलों ने इसे कमजोर सुरक्षा का परिणाम बताया है। कहा जा रहा है कि अदालत परिसर में प्रवेश करने वाले द्वार पर लगा मेटल डिटेक्टर काम नहीं कर रहा था, जिससे वकीलों के वेश में छिपे हमलावर हथियार लेकर अदालत तक पहुंचने में सफल रहे। जिला अदालतों के वकीलों ने शनिवार को काम के बहिष्कार का एलान किया है।