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अब आरक्षण में फंस गया मोदी सरकार का पांव

Mon, 10 Feb 2020 08:35 PM IST
अमित कुमार शशिधर पाठक, नई दिल्ली 
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थावरचंद गहलोत - फोटो : amar ujala
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अशोक भारती अंबेडकर आरक्षण को दलितों के हक की लड़ाई मानते हैं। अशोक का कहना है कि इसे लेकर रहेंगे। केंद्र सरकार को आरक्षण पर एक कानून लाना चाहिए। यह कानून न्यायपालिका के दायरे से बाहर हो। भारती मंगलवार से बड़े पैमाने पर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। 

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लोकसभा में भी आरक्षण को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। सदन में इस मुद्दे पर खूब हंगामा हुआ। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उच्चतम न्यायालय का फैसला आते ही मुद्दे को लपक लिया। राहुल और प्रियंका दोनों ने केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर घेरा और कहा कि सरकार आरक्षण देने के ही पक्ष में नहीं है। लोकसभा में विपक्ष ने सरकार पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया।

सरकार कर रही है गंभीरता से विचार : थावर चंद गहलोत

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने आरक्षण को लेकर विपक्ष के सांसदों की चिंता समेत अन्य पर अपनी राय रखी। थावर चंद गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार अनुसूचित जाति, जनजाति को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है। 

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में पक्षकार नहीं है और उच्चतम न्यायालय के फैसले को लेकर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। गहलोत ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार से कोई शपथ पत्र नहीं मांगा गया था। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस मामले को बेहद संवेदनशील बताया और कहा कि कांग्रेस को इस तरह के मामले में राजनीति नहीं करनी चाहिए।

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इस मामले में लोक जनशक्ति पार्टी, अपना दल, जद(यू) जैसे एनडीए में शामिल दलों की परेशानी साफ देखी गई। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने अपने आवास पर शाम सात बजे अनुसूचित जाति, जन जाति के सांसदों की एक बैठक भी बुलाई है। 

हालांकि इन तीनों दलों ने आरक्षण को लेकर विपक्ष के आरोपों को खारिज किया, लेकिन इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से असहमति जताते हुए केंद्र सरकार से आरक्षण को संविधान की नौंवी सूची में डालने की भी मांग की। चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण कोई खैरात नहीं है, बल्कि अनुसूचित जाति, जनजाति का संवैधानिक अधिकार है।

क्या है पूरा मामला?

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को आरक्षण से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए पदोन्नति में आरक्षण को मौलिक अधिकार मानने से इनकार कर दिया। शीर्षस्थ अदालत ने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। यह मामला 2012 में उत्तराखंड सरकार द्वारा पदोन्नति में आरक्षण न देने के बाद अदालत में आया था। 

तब उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी। उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के बाद कांग्रेस पार्टी ने कहा कि वह इससे सहमत नहीं है। केन्द्र सरकार को इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए। कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि केन्द्र सरकार और भाजपा आरक्षण देने के ही खिलाफ है। इस मामले को लेकर विपक्ष के तेवर काफी तीखे रहे।

केन्द्र सरकार के सामने आगे कुआं, पीछे खाई


आरक्षण को लेकर अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग बेहद संवेदनशील है। इस मामले में केंद्र सरकार और भाजपा के सामने जहां आगे कुआं है, वहीं पीछे खाई। भजपा के सहयोगी दल लोकजन शक्ति पार्टी, जद(यू), अपना दल को अदालत का यह निर्णय हजम नहीं हो रहा है। बिहार, बंगाल समेत देश में आगे आने वाले विधानसभा चुनावों में यह बड़ा मुद्दा बन सकता है। वहीं इस मामले में अनुसूचित जाति, जनजाति के हित को देखते हुए कदम उठाने पर अगड़ी जाति के नाराजगी का खतरा बना रहेगा।

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