अशोक भारती अंबेडकर आरक्षण को दलितों के हक की लड़ाई मानते हैं। अशोक का कहना है कि इसे लेकर रहेंगे। केंद्र सरकार को आरक्षण पर एक कानून लाना चाहिए। यह कानून न्यायपालिका के दायरे से बाहर हो। भारती मंगलवार से बड़े पैमाने पर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने आरक्षण को लेकर विपक्ष के सांसदों की चिंता समेत अन्य पर अपनी राय रखी। थावर चंद गहलोत ने कहा कि केंद्र सरकार अनुसूचित जाति, जनजाति को आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में पक्षकार नहीं है और उच्चतम न्यायालय के फैसले को लेकर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। गहलोत ने कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार से कोई शपथ पत्र नहीं मांगा गया था। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस मामले को बेहद संवेदनशील बताया और कहा कि कांग्रेस को इस तरह के मामले में राजनीति नहीं करनी चाहिए।
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को आरक्षण से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाते हुए पदोन्नति में आरक्षण को मौलिक अधिकार मानने से इनकार कर दिया। शीर्षस्थ अदालत ने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। यह मामला 2012 में उत्तराखंड सरकार द्वारा पदोन्नति में आरक्षण न देने के बाद अदालत में आया था।
तब उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी। उच्चतम न्यायालय का फैसला आने के बाद कांग्रेस पार्टी ने कहा कि वह इससे सहमत नहीं है। केन्द्र सरकार को इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए। कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि केन्द्र सरकार और भाजपा आरक्षण देने के ही खिलाफ है। इस मामले को लेकर विपक्ष के तेवर काफी तीखे रहे।
आरक्षण को लेकर अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग बेहद संवेदनशील है। इस मामले में केंद्र सरकार और भाजपा के सामने जहां आगे कुआं है, वहीं पीछे खाई। भजपा के सहयोगी दल लोकजन शक्ति पार्टी, जद(यू), अपना दल को अदालत का यह निर्णय हजम नहीं हो रहा है। बिहार, बंगाल समेत देश में आगे आने वाले विधानसभा चुनावों में यह बड़ा मुद्दा बन सकता है। वहीं इस मामले में अनुसूचित जाति, जनजाति के हित को देखते हुए कदम उठाने पर अगड़ी जाति के नाराजगी का खतरा बना रहेगा।