दिल्ली के चुनावी परिणाम पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। विशेषकर, भाजपा सांसदों में ज्यादा बेचैनी है। क्योंकि, एग्जिट पोल ने उनकी धड़कनें बढ़ा रखी हैं। वह लगातार दिल्ली के सांसदों से संपर्क कर पूछ रहे हैं कि सरकार किस पार्टी की बन रही है। यहां तक की संसद भवन में भी दिल्ली चुनाव पर जमकर चर्चा हुई।
मंगलवार को आने वाले परिणाम पर ना केवल दिल्ली को इंतजार है बल्कि पूरे भारत की नजर के साथ ही कई मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और देशभर के सांसद व पूर्व सांसदों की निगाहें लगी हैं। दिल्ली चुनाव प्रचार में उतरे भाजपा सांसदों को भी एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं हो रहा है।
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सभी सांसद कह रहे हैं कि जिस विधानसभा में प्रचार का कमान उन्हें सौंपा गया था उसमें इतनी भी बुरी स्थिति नहीं थी जितना एग्जिट पोल बता रहा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व सांसद मनोज तिवारी का वह ट्वीट भी चर्चा का विषय बना हुआ है जिसमें उन्होंने 48 सीट जीतने का दावा किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि ट्वीट को संभाल कर रखिएगा।
संसद सत्र के दौरान देशभर के सांसद मनोज तिवारी से पूछ रहे हैं कि इसमें कितनी सच्चाई है। दिल्ली के सांसदों की मानें तो पिछले दिनों चुनावी आकलन में सात सांसदों में कोई ऐसा सांसद नहीं मिला जिसने अपने संसदीय क्षेत्र में 5 से कम सीट जीतने की बात कही हो। इस लिहाज से पार्टी नेतृत्व भी आश्वस्त है। 2013 विधानसभा चुनाव परिणाम से सबक लेते हुए भाजपा त्रिशंकु परिणाम की स्थिति में सरकार बनाने की रणनीति से इस बार पीछे नहीं हटेगी।