गणतंत्र दिवस 2024 के मौके पर राष्ट्रीय राजधानी में अलग-अलग राज्यों और मंत्रालयों की झांकी दिखाई जाती है। पश्चिम बंगाल और पंजाब ने आरोप लगाया है कि उनकी झांकी के साथ कथित तौर पर भेदभाव किया गया है। इस मुद्दे पर रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने अहम बयान दिया है। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि गणतंत्र दिवस की थीम के तहत 'व्यापक विषय' को दिखाने में नाकाम रहने के कारण दोनों राज्यों की झांकियों को परेड का हिस्सा नहीं बनाया गया। सूत्रों ने कहा कि विशेषज्ञ समिति ने पहले तीन दौर की बैठकों में पंजाब की झांकी के प्रस्ताव पर विचार करने के बाद ही अंतिम फैसला लिया।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि पंजाब की झांकी व्यापक विषयों के साथ तालमेल वाली नहीं थी। इस कारण विशेषज्ञ समिति तीसरे दौर की बैठक के बाद इस पर आगे विचार नहीं कर सकी। पश्चिम बंगाल की झांकी को भी 2024 की गणतंत्र दिवस परेड में नहीं चुने जाने का कारण भी यही है। सूत्रों ने बताया कि बंगाल की झांकी पर अंतिम फैसला दो दौर की बैठकों में ही हो गया।
सभी को मौका दिलाने के लिए तीन साल का कार्यक्रम
सूत्रों के मुताबिक इस साल की परेड में पश्चिम बंगाल और पंजाब सहित कुल 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भाग लेने की इच्छा जाहिर की थी। हर साल की तरह 15-16 राज्यों को अंतिम रूप से चुना गया है। राज्यों की आलोचना को निराधार बताते हुए, रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा, केंद्र सरकार सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को कवर करते हुए तीन साल का कार्यक्रम तैयार कर रही है। इसे सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के साथ साझा किया जाएगा। एक सूत्र ने कहा, सभी राज्यों को अपनी झांकियां प्रदर्शित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
इसके अलावा, जिन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को कर्तव्य गणतंत्र दिवस परेड, 2024 के लिए नहीं चुना गया है, उन्हें 23-31 जनवरी 2024 तक लाल किले में भारत पर्व में अपनी झांकी प्रदर्शित करने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।
सूत्रों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान, विशेषज्ञ समिति ने पिछले 8 वर्षों में 5 बार पश्चिम बंगाल की झांकी को शॉर्टलिस्ट किया। इसी प्रक्रिया का पालन कर 2016, 2017, 2019, 2021, 2023 में झांकियों को शॉर्टलिस्ट किया गया। पंजाब की झांकी पिछले 8 वर्षों में 6 बार (वर्ष 2017 से 2022) शॉर्टलिस्ट हुई।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों की झांकी का मूल्यांकन 'झांकी के चयन के लिए विशेषज्ञ समिति' करती है। बैठकों के कई दौर के बाद अंतिम फैसला होता है। इसमें कला, संस्कृति, चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत, वास्तुकला, नृत्यकला जगत के विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
विशेषज्ञ समिति सिफारिश करने से पहले झांकी के विषय, अवधारणा, डिजाइन और प्रभाव जैसे आधारों पर प्रस्तावों की जांच करती है। परेड की कुल अवधि में झांकियों के लिए निश्चित समय आवंटित होता है। शॉर्टलिस्टिंग के बाद सर्वश्रेष्ठ झांकियों को परेड में भाग लेने का मौका मिलता है।