उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू (फाइल फोटो)
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राज्यसभा के सभापति एम.वेंकैया नायडू ने सदस्यों के व्यवहार पर टिप्पणी करते हुए उन्हें नसीहत और हितायत भी दी। सभापति ने कहा कि कुछ लोगों ने अपनी बात कहने के लिए सदन में व्यवधान उत्पन्न करने की आदत बना ली है। नायडू ने कहा कि अगर सदन में हंगामे के कारण शून्यकाल के विषय उस दिन नहीं उठाए जा सके तो वे अगले दिन के लिए स्वत: शामिल नहीं होंगे।
सामान्य तौर पर अगर शून्यकाल के मुद्दे व्यवधान के कारण नहीं उठाए जाते तो उन्हें अगले दिन उठाने की अनुमति मिल जाती थी अब विशेष अनुमति के बाद ही ऐसे मुद्दे अगले दिन उठाए जा सकेंगे। सभापति ने कहा कि कुछ लोगों ने अपनी बात कहने के लिए सदन में व्यवधान की आदत बना ली है। सदन में हंगामे की वजह से ही सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी जाती है क्योंकि वे नहीं चाहते कि ऐसे अशोभनीय दृश्य लोग देखें।
सदस्यों को लगता है कि अगर वे मुद्दे आज नहीं उठाए गए तो उन्हें अगले दिन शामिल कर लिया जाएगा। सभापति ने सदस्यों को निर्देश दिया कि वे सदन में कोई भी स्लोगन लिखी तख्ती, अखबार, मुंह पर एयर प्यूरीफायर या मास्क आदि नहीं प्रदर्शित करें। ऐसा करने पर कार्रवाई की जा सकती है। नायडू को इस बात पर भी आपत्ति थी कि कुछ सदस्य उन्हें पत्र लिखते हैं।
पत्र उन्हें मिलने से पहले ही मीडिया में लीक हो जाता है। इस तरह दबाव देने की रणनीति काम नहीं करेगी। सदन के अंदर बैठे-बैठे सांसदों के लगातार टिप्पणी करते रहने और आसन की अवहेलना करने के लेकर भी नायडू ने आगाह कर कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि राज्यसभा 250वां सत्र है। उन्होंने सदस्यों से अपील किया कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करें।